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गुमला जिला के सुदूर इलाके में रहने वाले लोगों को अस्पताल पहुंचने के लिए वाहन नहीं होता है नसीब, इलाज के लिए छत्तीसगढ़ जाना पड़ता है

गुमला जिला के सुदूर इलाके में रहने वाले लोगों को अस्पताल पहुंचने के लिए वाहन नहीं होता है नसीब, इलाज के लिए छत्तीसगढ़ जाना पड़ता है
न्यूज़ लहर संवाददाता
झारखंड : प्रदेश में विकास का दावा करने वाली सरकार का पोल गुमला जिला के एक घटना ने खोल कर रख दिया है और सरकार को आईना दिखा दिया है। झारखंड के गुमला जिला के सुदूर इलाके में रहने वाले लोगों को बीमार होने पर अस्पताल पहुंचने के लिए वाहन नहीं मिलता है। इतना ही नहीं उन लोगों को इलाज के लिए दूसरे राज्य में जाना पड़ता है।
आइए हम आपको गुमला जिला की भुक्तभोगी एक पीड़िता की परेशानियों से अवगत करा रहे हैं। गुमला जिला अंतर्गत रायडीह थाना स्थित नक्सल प्रभावित क्षेत्र नकटी झरिया ग्राम में
फुलमईत देवी 14 जुलाई 2023 को वह अपने घर के आंगन में बैठी हुई थी। इसी क्रम में उसके पेट सहित शरीर के कई हिस्सों में एकाएक फोड़ा निकलने लगा। यह देख उसके चार पुत्र, सोनू किसान, पन्नू किसान, शुक्रु किसान, झटकू किसान और पुत्रवधूओं ने गांव में सड़क नहीं होने के कारण चादर का बहिंगा ( इंसान ढोने का देहाती जुगाड़ ) बनाकर अपनी मां को गांव से 5 किलोमीटर दूर स्थित मुख्य सड़क तक उक्त लोगों ने बारी-बारी से कंधे में ढोकर फुलमईत देवी को मुख्य सड़क तक ले गये। फिर ऑटो से फुलमईत देवी को इलाज के लिए लोदाम छत्तीसगढ़ स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।
जहां उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे जशपुर सदर अस्पताल (छत्तीसगढ़) रेफर कर दिया गया। जहां उसका इलाज चल रहा है। उक्त सभी लोग झारखंड में रहते हैं, लेकिन इलाज कराने के लिए छत्तीसगढ़ जाना पड़ा। गुमला जिला अंतर्गत रायडीह थाना स्थित नक्सल प्रभावित क्षेत्र नकटी झरिया ग्राम में आजादी के 70 साल बाद भी सड़क नहीं होने के कारण वहां के लोग आदिम युग में जीने के लिए मजबूर हैं। कोई जनप्रतिनिधि भी इस गांव की सुध नहीं लेते हैं।

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