एसीबी झारखंड कार्यालय से सीबीआई के दस्तावेज की चोरी, मामला दर्ज

न्यूज़ लहर संवाददाता
झारखंड :गलत पता और नासमझी के कारण रांची स्थित भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) झारखंड के कार्यालय से सीबीआई के एक अहम कांड के दस्तावेज की चोरी हो गई है। इस संबंध में कांके रोड स्थित भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की निर्गत शाखा में पदस्थापित आरक्षी राजू रंजन कुमार ने कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है।इस चोरी में एसीबी कार्यालय के कर्मचारी संदेह के दायरे में आ गए है।
बताया जा रहा है कि सीबीआई के लखनऊ ब्रांच की तरफ से रांची स्थित भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को डाक के माध्यम से कुछ दस्तावेज भेजा गया था। डाक के ऊपर सीबीआई भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो(एसीबी) लिखा हुआ था।
जब दस्तावेज डाकघर में पहुंचा, तो डाकिए को लगा कि वह दस्तावेज झारखंड एंटी करप्शन ब्यूरो का हैं। इसके बाद डाकिया ने उस दस्तावेज को एंटी करप्शन ब्यूरो झारखंड के ऑफिस में पहुंचा दिया। एंटी करप्शन ब्यूरो में डाक को रिसीव भी कर लिया ।जबकि उसके ऊपर सीबीआई एसीबी लिखा हुआ था।
इसी दौरान एंटी करप्शन ब्यूरो के आरक्षी राजू ने डाक को देखा और जानकारी हासिल की कि यह डाक सीबीआई का है और गलती से यहां आ गया है। उन्होंने डाक को एंटी करप्शन ब्यूरो झारखंड की महिला आरक्षी पुनम कुमारी को सौंप दिया। जिसके बाद सभी कर्मचारियों के सामने ही पूनम कुमारी ने डाक को अपने टेबल के दराज में रख दिया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जब सुबह एसीबी के कर्मचारी ऑफिस पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि पूनम कुमारी के ड्राबर से वह दस्तावेज गायब है, और काफी खोजबीन के बाद भी वह दस्तावेज नहीं मिला।तब मामले को लेकर एंटी करप्शन ब्यूरो ने रांची के कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाई गई। वहीं, इस मामले की जानकारी सीबीआई को भी दी गई। इसके बाद सीबीआई के अधिकारी भी इस मामले की जांच में जुट गए।
रांची के कोतवाली थाना प्रभारी शैलेश प्रसाद ने बताया कि एंटी करप्शन ब्यूरो के द्वारा डाक चोरी होने के मामले में प्राथमिकी दर्ज करवाई गई है, और पुलिस मामले की तफ्तीश कर रही है।
जानकारी के अनुसार लखनऊ से एक महत्वपूर्ण कागजात डाक के माध्यम से रांची भेजा गया था। डाक में पते की जगह सीबीआई एसीबी लिखा गया था। लेकिन डाकिया के द्वारा उस डाक को रांची के एंटी करप्शन ब्यूरो के कार्यालय में रिसीव करवा दिया गया। अब डाक एंटी करप्शन ब्यूरो के कार्यालय से चोरी हो गया है। पूरा मामला संदेहास्पद है, ऐसे में एंटी करप्शन ब्यूरो में कार्यरत कुछ कर्मचारी संदेह के घेरे में हैं।