चले थे अधिवक्ता को फंसाने, स्वयंभू ब्लैकमेलर पत्रकार गिरोह के मोहरा को कोर्ट ने बनाया आरोपी, अब चलेगा ट्रायल

न्यूज़ लहर संवाददाता
झारखंड: पूर्वी सिंहभूम जिला स्थित जमशेदपुर में स्वयंभू ब्लैकमेलर गिरोह के सरगना विनोद सिंह अधिवक्ता संजय कुमार सिंह को फंसाने के लिए महाठग का इंटरव्यू लेकर किचड़ उछालने का प्रयास किया था।अब वह महाठग दिलीप कुमार झा को कोर्ट ने अमानत में ख़यानत करने का आरोपी माना है। इसके विरुद्ध धारा 406 भादवि के तहत ट्रायल चलेगा। दोष सिद्ध हो जाता है तो उसे 3 वर्ष की सजा होना तय है।
ज्ञात हो कि कुछ दिन पहले स्वयंभू ब्लैकमेलर पत्रकार गिरोह के सरगना विनोद सिंह ने अधिवक्ता संजय कुमार सिंह को बदनाम करने के नियत से दिलीप कुमार झा का इंटरव्यू लेकर अपने फेसबुक और पोटल पर प्रकाशन किया था। जिसमें बताया गया था कि Law Friends Associate एवं न्यूज़ लहर कार्यालय को ग़लत तरीके से कब्जा किया गया है।उस दौरान न्यूज़ लहर की ओर से बताया गया था कि संजय कुमार सिंह अधिवक्ता है और उन्हें गलत व सही तथा कानून का ज्ञान है।इस लिए वे गलत नहीं है। इसके बाद भी उन पर ब्लैकमेलर पत्रकार गिरोह द्वारा दिलीप कुमार झा के कंधे का इस्तेमाल कर खुब किचड़ उछाला गया। दूसरी ओर पहले से दिलीप कुमार झा, रंजीत मुखर्जी, विश्वजीत मुखर्जी, इंद्रजीत मुखर्जी सहित अन्य के विरुद्ध कोर्ट में केस लंबित था दिलीप कुमार झा को यह ज्ञात था की उमा चटर्जी को 2007 में कोर्ट के द्वारा डिग्री मिल चुका है इसके वावजूद भी Judgment debtor के द्वारा उमा चटर्जी की संपत्ति को दिलीप कुमार झा ने 2008 में गलत तरीके से अपने नाम पर रजिस्ट्री करवा लिया । तब इन लोगों के विरुद्ध वृद्ध 80 वर्षीय उमा चटर्जी की पुत्री पी चटर्जी ने मुकदमा दायर किया था। जिसमें उन्होंने बताया था कि उनकी वृद्ध माता उमा चटर्जी की संपत्ति को गलत तरीके से इन लोगों ने 2008 में बेच दिया है। कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए दिलीप कुमार झा एवं अन्य अभियुक्तों को धारा 406 के तहत आरोपीत किया है । उमा चटर्जी के decree के आधार पर अधिवक्ता संजय कुमार सिंह ने न्यूज़ लहर वाले कार्यालय को खरीदा था।जिसे दिलीप कुमार झा अपना बताते हुए संजय कुमार सिंह पर आरोप लगाया था कि वे जबरन कब्जा कर रखे हैं। इस बाबत इंटरव्यू स्वयंभू पत्रकार गिरोह के सरगना विनोद सिंह ने इंटरव्यू के नाम पर अपने और गिरोह के अन्य सदस्यों के फेसबुक व अन्य साधनों पर प्रकाशित किया था। इस गिरोह का एकमात्र उद्देश्य था संजय कुमार सिंह को किसी तरह से डराया धमकाया जाए, बदनाम किया जाए,बदले में ब्लैक मेलिंग कर रूपए वसूला जाए।इस गिरोह के सरगना विनोद सिंह ने पूर्व से 12 लाख रुपए मांगे थे। जो साइबर थाना में दर्ज है और अनुसंधान में वह मामला सत्य पाया गया है। इसी तरह किशन यादव ने भी 2010 में न्यूज़ लहर कार्यालय के खरीदने संबंधी कागजात बनाकर अपना दावा पेश किया था। यह मुकदमा स्थानीय आर एस पांडे की अदालत में ट्रायल चल रहा था। इसके विरुद्ध अधिवक्ता संजय कुमार सिंह हाईकोर्ट चले गए। जहां से कोर्ट ने पूरे मामले की सुनवाई करते हुए, मामले quash कर दिया। अब आप सुधि पाठक समझ सकते हैं कि स्वयंभू ब्लैकमेल पत्रकार गिरोह किस तरह लोगों को डरा धमकाकर और बदनाम करने की धमकी दे कर शहरी ब्लैकमेल कर रुपए का उगाही कर रहा था। अब तक जितने भी आरोप इस ब्लैकमेलरों ने लोगों पर आरोप लगाए हैं, जिसका कोई आधार नहीं है ।सारे मामले कोर्ट में खारिज होंगे और इस पर साइबर अपराध और मानहानि के दावे से संबंधित मुकदमे चलेंगे। अब परिणाम आने शुरू हो गए हैं। इसकी दुर्गति तय मानी जा रही है।