Aditya-L1,15 लाख KM दूर मंजिल, 125 दिनों की यात्रा’, चंद्रविजय के बाद आज ISRO के सामने SUN एक्सपेरिमेंट का चैलेंज

न्यूज़ लहर संवाददाता
आंध्र प्रदेश: दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान 3 की ऐतिहासिक लैंडिंग के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) एक बार फिर इतिहास रचने की दहलीज पर है।अब देश के साथ-साथ विश्व देश की निगाहें ISRO के सूर्य मिशन यानी Aditya-L1 पर टिकी हैं। इसका काउंटडाउन भी शुरू हो गया है। मिशन आज सुबह 11.50 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्पेस स्टेशन से लॉन्च किया जाएगा। लॉन्चिंग के ठीक 127 दिन बाद यह अपने पॉइंट L1 तक पहुंचेगा। इस पॉइंट पर पहुंचने के बाद Aditya-L1 बेहद अहम डेटा भेजना शुरू कर देगा।
खगोल वैज्ञानिक सोमक रायचौधरी ने कहा कि सूर्य मिशन Aditya-L1 की क्षमता विज्ञान के क्षेत्र में बड़ा चमत्कार करने की है। लेकिन सूर्य से निकलने वाले कणों से पृथ्वी पर संचार को नियंत्रित करने वाले सैटेलाइट्स प्रभावित हो सकते हैं।
ISRO के पूर्व वैज्ञानिक मनीष पुरोहित ने कहा कि इसरो और भारत के लिए यह बहुत बड़ा कदम है। देश की नई अंतरिक्ष नीति के साथ यह स्पष्ट है कि इसरो स्पेस इकोनॉमी में बहुत बड़ी भूमिका निभाएगा।इसलिए इसरो ने स्पष्ट रूप से इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
16 दिनों तक आदित्य-L1 धरती के चारों तरफ चक्कर लगाएगा। इस दौरान पांच ऑर्बिट मैन्यूवर होंगे, ताकि सही गति मिल सके।इसके बाद आदित्य-L1 का ट्रांस-लैरेंजियन 1 इंसर्शन (Trans-Lagrangian 1 Insertion – TLI) होगा।फिर यहां से उसकी 109 दिन की यात्रा शुरू होगी। जैसे ही आदित्य-L1 पर पहुंचेगा, वह वहां पर एक ऑर्बिट मैन्यूवर करेगा। ताकि L1 प्वाइंट के चारों तरफ चक्कर लगा सके।
इसरो सूर्य की गतिविधि समझने के लिए जिस Aditya-L1 मिशन को लॉन्च कर रहा है, उसमें PSLV-XL रॉकेट बेहद जरूरी भूमिका निभाने वाला है। यह वह रॉकेट है जो Aditya-L1 को अंतरिक्ष में छोड़ेगा। यह पीएसएलवी की 59वीं उड़ान है। एक्सएल वैरिएंट की 25वीं उड़ान है। लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड 2 से हो रही है।यह रॉकेट 145.62 फीट ऊंचा है। रॉकेट आदित्य-L1 को धरती की निचली कक्षा में छोड़ेगा। जिसकी पेरिजी 235 किलोमीटर और एपोजी 19,500 किलोमीटर होगी।पेरीजी यानी धरती से नजदीकी दूरी और एपोजी यानी अधिकतम दूरी।