गणेशोत्सव की सम्पूर्ण जानकारी

न्यूज़ लहर संवाददाता
विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता, भगवान श्री गणेश से प्रार्थना है कि सबको सुख-समृद्धि तथा आरोग्यता का आशीर्वाद प्रदान करें।
हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी से अनंत चौदस तक *गणेशोत्सव* को सेलिब्रेट किया जाता है। महाराष्ट्र समेत तमाम राज्यों में इस पर्व को काफी धूमधाम से मनाया जाता है। गणेशोत्सव के दौरान भगवान गणेश के भक्त उन्हें घर पर लेकर आते हैं, दस दिनों तक उनका विशेष पूजन करते हैं और इसके बाद गणपति का विसर्जन कर दिया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि श्री गणेश महोत्सव की इस तरह मनाने की शुरुआत कब, कैसे हुई थी, जानिए इतिहास..!
गणेश चतुर्थी के महापर्व पर पूजा प्रारंभ होने की सही तारीख किसी को ज्ञात नहीं है, हालांकि इतिहास के अनुसार, यह अनुमान लगाया गया है कि गणेश चतुर्थी 1630-1680 के दौरान छत्रपति शिवाजी ( मराठा साम्राज्य के संस्थापक ) के समय में एक सार्वजनिक समारोह के रूप में मनाया जाता था। शिवाजी के समय, यह गणेशोत्सव उनके साम्राज्य के कुलदेवता के रूप में नियमित रूप से मनाना शुरू किया गया था।
पेशवाओं के अंत के बाद, यह एक पारिवारिक उत्सव बना रहा।
कहा जाता है कि गणेशोत्सव की नींव आजादी की लड़ाई के दौरान लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने रखी थी, आमजन को एकजुट करने के लिए उन्होंने धार्मिक मार्ग चुना और 1893 में गणेशोत्सव को पुनर्जीवित किया था।
★ अंग्रेजों के खिलाफ शुरू की बगावत-
आज से लगभग सौ वर्ष पहले लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने ही गणेशोत्सव की नींव रखी थी, इस महापर्व को मनाने के पीछे का उद्देशय अंग्रेजों के खिलाफ भारतीयों को एकजुट करना था, आज जिस गणेशोत्सव को लोग इतनी धूम-धाम से मनाते हैं, उस पर्व को शुरू करने में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था..!
★ कैसे हुई विसर्जन की शुरुआत-
1890 के दशक में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान तिलक अक्सर चौपाटी पर समुद्र के किनारे बैठते थे और वे इसी सोच में डूबे रहते थे कि आखिर लोगों को जोड़ा कैसे जाए, अंग्रेजों के खिलाफ एकजुटता बनाने के लिए..?
उन्होंने धार्मिक मार्ग चुना, तिलक ने सोचा कि क्यों न गणेशोत्सव को घरों से निकालकर सार्वजनिक स्थल पर मनाया जाए, ताकि इसमें हर जाति के लोग शिरकत कर सकें..!
★ गणेश मूर्ति विसर्जन की पौराणिक कथा :-
धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार श्री वेद व्यास ने गणेश चतुर्थी से महाभारत कथा श्री गणेश को लगातार 10 दिन तक सुनाई थी जिसे श्री गणेश जी ने अक्षरश: लिखा था, 10 दिन बाद जब वेद व्यास जी ने आंखें खोली तो पाया कि 10 दिन की अथक मेहनत के बाद गणेश जी का तापमान बहुत बढ़ गया है, तुरंत वेद व्यास जी ने गणेश जी को निकट के सरोवर में ले जाकर ठंडे पानी से स्नान कराया था, इसलिए गणेश स्थापना कर चतुर्दशी को उनको शीतल किया जाता है..!
★ क्या कहती है वेद व्यास की कथा-
इसी कथा में यह भी वर्णित है कि श्री गणपति जी के शरीर का तापमान ना बढ़े इसलिए वेद व्यास जी ने उनके शरीर पर सुगंधित सौंधी माटी का लेप किया, यह लेप सूखने पर गणेश जी के शरीर में अकड़न आ गई, माटी झरने भी लगी…तब उन्हें शीतल सरोवर में ले जाकर पानी में उतारा, इस बीच वेदव्यास जी ने 10 दिनों तक श्री गणेश को मनपसंद आहार अर्पित किए तभी से प्रतीकात्मक रूप से श्री गणेश प्रतिमा का स्थापन और विसर्जन किया जाता है और 10 दिनों तक उन्हें सुस्वादु आहार चढ़ाने की भी प्रथा है..!
★ ये भी है मान्यता :-
मान्यता है कि गणपति उत्सव के दौरान लोग अपनी जिस इच्छा की पूर्ति करना चाहते हैं, वे भगवान गणपति के कानों में कह देते हैं, गणेश स्थापना के बाद से 10 दिनों तक भगवान गणपति लोगों की इच्छाएं सुन-सुनकर इतना गर्म हो जाते हैं कि चतुर्दशी को बहते जल में विसर्जित कर उन्हें शीतल किया जाता है..!
★ क्यों लगाते हैं गणपति बप्पा मोरया का जयकारा :-
गणपति बप्पा से जुड़े मोरया नाम के पीछे गणपति जी का मयूरेश्वर स्वरूप माना जाता है, गणेश-पुराण के अनुसार सिंधु नामक दानव के अत्याचार से बचने के लिए देवगणों ने गणपति जी का आह्वान किया… सिंधु का संहार करने के लिए गणेश जी ने मयूर को वाहन चुना और छह भुजाओं का अवतार धारण किया, इस अवतार की पूजा भक्त गणपति बप्पा मोरया के जयकारे के साथ करते हैं..!
।। *गणपति बप्पा मोरिया* ।।
गणेश चतुर्थी के इस पावन अवसर पर, भगवान गणेश की कृपा और आशीर्वाद आप सभी के साथ हो। इसी मंगल कामना के साथ गणेश चतुर्थी की आप सभी को पुनः शुभकामनाएँ।
सौजन्य भगवद्गीता समूह*