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तीन दिवसीय सेमिनार में आचार्य संपूर्णानंद अवधूत ने बताया – “मंत्र चैतन्य का महत्व”**

 

न्यूज़ लहर संवाददाता

झारखंड: पूर्वी सिंहभूम जिला स्थित जमशेदपुर के गदरा आनंद मार्ग ने तीन दिवसीय प्रथम संभागीय सेमिनार का आयोजन किया, जिसमें आचार्य संपूर्णानंद अवधूत ने मंत्र चैतन्य के महत्व पर व्याख्यान दिया।

 

सेमिनार के मुख्य प्रशिक्षक आचार्य संपूर्णानंद ने बताया कि सही मंत्र चैतन्य से युक्त होना आध्यात्मिक साधना में क्रियाशीलता को बढ़ाता है। उन्होंने इष्ट मंत्र, गुरु मंत्र, कीर्तन मंत्र, बीज मंत्र आदि के महत्व को बताया और चैतन्य युक्त मन्त्र की महत्वपूर्णता पर जोर दिया।

 

मंत्र चैतन्य के बारे में बोलते हुए आचार्य संपूर्णानंद ने कहा, “जब महाकौल किसी मन्त्र के द्वारा कुल कुंडलिनी को मूलाधार चक्र से उपर उठाकर शंभूलिंग तक ले जाते हैं, तो यह पुरश्चरण कहलाता है और मन्त्र में चैतन्य शक्ति आती है।”

 

उन्होंने सुनना, मनन, और निदिध्यासन के माध्यम से मंत्र चैतन्य को आत्मसात करने का मार्ग बताया और दीक्षा की महत्वपूर्णता पर भी चर्चा की। साधकों को श्रवण, मनन, और निदिध्यासन के माध्यम से आध्यात्मिक साधना में प्रगट होने का संदेश दिया गया।

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