विजया गार्डन में दो घरों में चोरी, 50 लाख से अधिक के गहने और नकद गायब

न्यूज़ लहर संवाददाता
झारखंड: पूर्वी सिंहभूम जिला स्थित जमशेदपुर के बिरसा नगर थाना अंतर्गत विजया गार्डन में बीती रात चोरों ने दो घरों में चोरी की घटना को अंजाम दिया। इस घटना में 12th फेस के रहने वाले भारतीय जल सेना के मरिन में कार्यरत श्यामसुंदर पांडे के 509 नंबर और स्टेट बैंक डिब्रुगढ़ के मैनेजर रवि रंजन के 523 नंबर डुप्लेक्स में चोरों ने घटना को अंजाम दिया।
श्यामसुंदर पांडे के भाई हरिशंकर पांडे ने बताया कि कुछ दिन पूर्व ही दोनों भतीजे की जनेऊ संपन्न हुआ था, जिसे लेकर पूरा परिवार रामलला के दर्शन करने के लिए अयोध्या गया हुआ था। प्रत्येक दिन की तरह घर का सर्वेंट बागवानी में पानी देने के लिए सुबह 11:00 बजे के लगभग आई थी। तभी उसने देखा कि घर का मुख्य दरवाजा खुला हुआ है और लॉक टूटा हुआ पड़ा है। इसके बाद उसने फोन से परिवार वालों को सूचना दी। हरिशंकर पांडे को जब उसके भाई ने सूचना दी, तो वह तुरंत घर पहुंचे और पाया कि घर के सभी कमरों का सामान बिखरा पड़ा है। अलमारी में रखे गहने और नगद चोरी हो गए हैं। इसके बाद उन्होंने बिरसा नगर थाना को सूचना दी।
चोरों ने स्टेट बैंक के मैनेजर रवि रंजन के 523 नंबर डुप्लेक्स के घर को भी निशाना बनाया। दरवाजा तोड़कर घर में प्रवेश किया, लेकिन उनके परिचित के अनुसार घर से कोई कीमती सामान चोरी नहीं हुआ है। अब उनके परिवार के लोग आने के बाद ही सही जानकारी हो पाएगी। हरिशंकर पांडे ने बताया कि भाई के परिवार आने के बाद ही चोरी का सही आकलन हो पाएगा। वैसे अनुमान है कि 50 लाख से एक करोड़ के बीच नगद और जेवरात चुराए गए हैं। फिलहाल पुलिस परिवार की लिखित शिकायत और सीसीटीवी में कैद तस्वीर के आधार पर कार्रवाई शुरू करेगी।
इस घटना को लेकर विजया गार्डन के लोगों में भय का माहौल है और वे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आक्रोशित हैं। विजया गार्डन सोसायटी नॉर्दर्न जोन के जनरल सेक्रेटरी रवि सिंह ने पूरी घटना की निंदा करते हुए सुरक्षा पर सवाल उठाया कि आखिर पूरे विजया गार्डन में इतनी ज्यादा संख्या में सुरक्षाकर्मी होने के बावजूद चोरों ने एक ही रात में दो अलग-अलग घरों में इतनी बड़ी घटना को अंजाम कैसे दिया। कहीं न कहीं सुरक्षा में लापरवाही और चूक हुई है। इसलिए उन्होंने सिक्योरिटी एजेंसी एमएसए के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।