भाजपा ने फिर चौंकाया, मध्यप्रदेश के बाद ओड़िशा का मुख्यमंत्री भी मोहन को बनाया! BJP यहां पहली बार बनाएगी सरकार

न्यूज़ लहर संवाददाता
नई दिल्ली: पिछले एक दशक की राजनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कई फैसलों से लोगों को चौंकाया है।पार्टी के अंदरूनी मसले हों या सरकार के फैसले, मोदी ने कई बार अचंभित किया है।बात जब-जब राज्यों की बागडोर सौंपने की आई तो बीजेपी आलाकमान या कहें मोदी ने अप्रत्याशित फैसले ही लिए।इस फैसलों के मूल में जातिगत समीकरण रहे।कुछ ऐसा ही फैसला मंगलवार को ओड़िशा को लेकर लिया गया है।
ओड़िशा में हुए विधानसभा चुनाव परिणाम में बीजेपी के लिए जीत का पिटारा खुला।सूबे की 147 सीटों में से 78 पर कब्जा कर लिया।करीब ढाई दशक से राज कर रही बीजेडी को मात देकर बीजेपी अब राज्य में पहली बार सरकार बनाने जा रही है। नतीजे आने के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का एक बवंडर उठा, जिसके अंदर एक सवाल था- आखिर सूबे की सत्ता किसके हाथ में सौंपी जाएगी?
ओड़िशा के सीएम फेस की रेस में एक नहीं बल्कि कई नाम थे।इसमें एक नाम धर्मेंद्र प्रधान का भी था।जो कि 2019 की मोदी कैबिनेट का हिस्सा भी थे।इस बार वो संबलपुर सीट चुनाव लड़े थे और जीते भी।अब उन्हें नरेंद्र मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में मंत्री बना दिया गया है।इस जिम्मेदारी के साथ ही उनके नाम पर विराम लग गया।फिर चर्चा शुरू हुई सुरेश पुजारी की, जोकि पुजारी ब्रजराजनगर सीट से विधायक चुने गए हैं।
सीएम फेस की रेस में सुरेश पुजारी के साथ ही मनमोहन सामल के नाम की भी चर्चा रही। वो ओड़िशा बीजेपी के अध्यक्ष हैं। इस रेस में एक अहम नाम था गिरीश मुर्मू का।भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक गिरीश मुर्मू केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के पहले उपराज्यपाल रहे हैं। मुर्मू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीब माने जाते हैं।जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब मुर्मू उनके प्रधान सचिव थे।
इन तमाम नामों की चर्चा के बीच मंगलवार को बीजेपी के संकटमोचक राजनाथ सिंह भपेंद्र यादव के साथ ओड़िशा पहुंचते हैं।यहां विधायक दल की मीटिंग होती है।इस मीटिंग में सीएम पद के लिए मोहन चरण माझी व दो डिप्टी सीएम कनक वर्धन सिंह देव और प्रवती परिदा के नाम पर मोहर लगी। यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि जातिगत समीकरण का विशेष ध्यान रखा गया है।
बीजेपी ने यहां एक बार फिर वही किया जो पूर्व में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हुआ था।इन तीनों राज्यों में विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद कई कद्दावर नेता सीएम फेस की रेस में थे।मध्य प्रदेश में तो माना जा रहा था कि ‘जनता के मामा’ और ‘लाडली बहनों के भाई’ शिवराज सिंह चौहान को ही सीएम बनाया जाएगा।मगर, ऐसा नहीं हुआ।
यही स्थिति राजस्थान में देखने को मिली थी।चुनाव परिणाम आए तो बीजेपी के खाते में 116 सीटें आईं। कांग्रेस को 68 सीटें ही मिलीं। इसके बाद चर्चा शुरू हुई सीएम कौन होगा। बालकनाथ, सीपी जोशी, दिया कुमारी, गजेंद्र सिंह शेखावत, भूपेंद्र चौधरी और वसुंधरा राजे जैसे नामों की चर्चा हुई। तमाम अटकलों के बीच बीजेपी ने भजनलाल शर्मा को सीएम बनाने का फैसला कर लिया।
छत्तीसगढ़ में अप्रत्याशित जीत के बाद बीजेपी ने सीएम फेस को लेकर फैसला भी अप्रत्याशित ही लिया था। रेस में रमन सिंह, ओपी चौधरी जैसे नाम थे। मगर बीजेपी ने राज्य की बागडोर विष्णुदेव साय को सौंपी। ओडिशा में पहली बार सरकार बना रही बीजेपी ने आदिवासी समुदाय से आने वाले चरण माझी को राज्य की कमान सौंपी है।