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हिन्दू समाज को सोचना होगा, ये अपमान संयोग है या प्रयोग…’, लोकसभा में बोले पीएम मोदी

न्यूज़ लहर संवाददाता
नई दिल्ली:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे हैं।पीएम मोदी के संसद पहुंचने पर एनडीए के सांसदों ने मोदी-मोदी के नारों से उनका स्वागत किया। इससे पहले बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि अवधेश पासी जहां से जीतकर आए हैं, उस सीट का नाम अयोध्या नहीं फैजाबाद है लेकिन यहां किसी ने फैजाबाद नहीं कहा।यही बीजेपी की, मोदी की जीत है।18वीं लोकसभा के गठन के बाद संसद का यह पहला सत्र है।

पीएम मोदी ने कहा कि सदन में इस झूठ की परंपरा को लेकर कठोर कार्रवाई करेंगे, ऐसी अपेक्षा है।कांग्रेस ने संविधान के मुद्दे पर भी देशवासियों से हमेशा झूठ बोला है। विनम्रतापूर्वक देशवासियों के सामने सच्चाई रखना चाहता हूं। देशवासियों को भी ये जानना बहुत जरूरी है। इमरजेंसी का ये 50वां वर्ष है। इमरजेंसी सत्ता के लोभ के कारण देश पर थोपा गया तानाशाही शासन था।कांग्रेस ने क्रूरता की सभी हदें पार कर दी थीं, अपने ही देशवासियों पर क्रूरता का पंजा फैलाया था।सरकारें गिराना, मीडिया को दबाना हर कारनामे संविधान की भावना, संविधान के एक-एक शब्द के खिलाफ थे।ये वो लोग हैं जिन्होंने देश के पिछड़ों के साथ, दलितों के साथ घोर अन्याय किया है। इसी कारण से बाबा साहब आंबेडकर ने कांग्रेस की दलित-पिछड़े विरोधी मानसिकता के कारण नेहरूजी की कैबिनेट से इस्तीफा दिया था।उन्होंने पर्दाफाश किया था कि कैसे नेहरूजी ने दलितों-पिछड़ों के साथ अन्याय किया। बाबासाहब ने कैबिनेट से इस्तीफा देते समय जो कारण बताए थे, वह इनकी मानसिकता को दर्शाते हैं।बाबासाहब ने कहा था कि अनुसूचित जातियों की उपेक्षा के कारण अपने आक्रोश को रोक नहीं सका।नेहरूजी ने बाबासाहब का राजनीतिक जीवन खत्म करने के लिए पूरी ताकत लगा दी।पहले षड़यंत्र पूर्वक चुनाव में हरवाया गया। इतना ही नहीं, इस पराजय का जश्न मनाया और खुशी उन्होंने व्यक्त की।एक पत्र में यह लिखित है इस खुशी का।बाबासाहब की तरह ही दलित नेता बाबू जगजीवन राम को भी उनका हक नहीं दिया गया। इमरजेंसी के बाद जगजीवन राम के पीएम बनने की संभावना थी।इंदिरा गांधी ने ये पक्का किया कि जगजीवन राम किसी भी कीमत पर पीएम न बने। एक किताब में लिखा है कि अगर बन गए तो वे हटेंगे नहीं।कांग्रेस ने चौधरी चरण सिंह के साथ भी यही व्यवहार किया। पिछड़ों के नेता, कांग्रेस के अध्यक्ष, बिहार के सपूत सीताराम केशरी के साथ भी अपमानित व्यवहार करने का काम इसी कांग्रेस ने किया।कांग्रेस आरक्षण की घोर विरोधी रही है। नेहरूजी ने तो मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखकर आरक्षण का साफ-साफ विरोध किया था।इंदिरा गांधी ने मंडल कमीशन की रिपोर्ट वर्षों तक ठंडे बस्ते में दबाए रखा था।राजीव गांधी जब विपक्ष में थे, उनका सबसे लंबा भाषण आरक्षण के खिलाफ था जो आज भी संसद के रिकॉर्ड में उपलब्ध है।आज एक गंभीर विषय पर आपका और देशवासियों का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं।कल जो हुआ, देश के कोटि-कोटि वासी सदियों तक माफ नहीं करेंगे।131 साल पहले स्वामी विवेकानंदजी ने शिकागो में कहा था कि मुझे गर्व है कि मैं उस धर्म से आता हूं जिसने पूरी दुनिया को सहिष्णुता और वैश्विक स्वीकृति सिखाई है।विवेकानंदजी ने शिकागो में हिंदू धर्म के लिए दुनिया के दिग्गजों के सामने कहा था। हिंदू के कारण ही भारत की विविधता पनपी है और पनप रही है। गंभीर बात है कि आज हिंदुओं पर झूठा आरोप लगाने की साजिश हो रही है, गंभीर षड़यंत्र हो रहा है। ये कहा गया हिंदू-हिंदू हिंसक होते हैं। ये है आपका संस्कार, आपका चरित्र, आपकी सोच, आपकी नफरत।देश के हिंदुओं के साथ ये कारनामे।ये देश शताब्दियों तक इसे भूलने वाला नहीं है।कुछ दिन पहले हिंदुओं में जो शक्ति की कल्पना है, उसके विनाश की कल्पना की गई थी। ये देश सदियों से शक्ति का उपासक रहा है। ये बंगाल मां दुर्गा की, मां काली की पूजा करता है, उपासना करता है,आप उस शक्ति के विनाश की बात करते हो। ये वो लोग हैं जिन्होंने हिंदू आतंकवाद ये शब्द गढ़ने की कोशिश की थी।इनके साथी हिंदू धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया ऐसे शब्दों से करें, ये देश कभी माफ नहीं करेगा।एक सोची-समझी साजिश के तहत इनका पूरा इकोसिस्टम हिंदू परंपरा को नीचा दिखाना, अपमानित करना, मजाक उड़ाना ये फैशन बना दिया है। हम बचपन से सीखते हुए आए हैं, गांव का हो शहर का हो, अमीर हो गरीब हो, ईश्वर का हर रूप दर्शन के लिए होता है।ईश्वर का कोई भी रूप निजी स्वार्थ के लिए, प्रदर्शन के लिए नहीं होता। जिसके दर्शन होते हैं, उनके प्रदर्शन नहीं होते।हमारे देवी-देवताओं का अपमान 140 करोड़ देशवासियों के हृदय को गहरी चोट पहुंचा रहा है। निजी राजनीतिक स्वार्थ के लिए ईश्वर के रूपों का इस तरह से खेल। सदन में कल का दृश्य देखकर अब हिंदू समाज को सोचना पड़ेगा कि क्या ये अपमान कोई संयोग है या बड़े प्रयोग की तैयारी है।

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