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जमशेदपुर: करीम सिटी कॉलेज के भूगोल विभाग द्वारा स्वर्ण रेखा बेसिन का सर्वेक्षण

 

 

झारखंड: पूर्वी सिंहभूम जिला स्थित जमशेदपुर करीम सिटी कॉलेज के भूगोल विभाग के अंतिम सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने हाल ही में स्वर्ण रेखा बेसिन के आसपास के क्षेत्र का सर्वेक्षण किया। यह महत्वपूर्ण कार्य डम्पी लेवल और इंडियन क्लिनोमीटर का उपयोग करके किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने भूगोल के विभिन्न सिद्धांतों और तकनीकों को व्यावहारिक रूप से लागू किया।

मार्गदर्शन और प्रशिक्षण

 

इस सर्वेक्षण का मार्गदर्शन भूगोल विभाग के अध्यक्ष डॉ. आले अली, सहायक प्रोफेसर फरज़ाना अंजुम, और डॉ. पसारुल इस्लाम ने किया। डॉ. आले अली ने विद्यार्थियों को भूगोल में सर्वेक्षण के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डम्पी लेवल और इंडियन क्लिनोमीटर दोनों ही उपकरण सर्वेक्षण और निर्माण में कोण और ऊँचाई मापने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

उपकरणों का महत्व

 

डम्पी लेवल: यह उपकरण मुख्य रूप से सतहों को समतल करने के लिए उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग निर्माण में नींव के स्तर को निर्धारित करने और सड़क निर्माण के दौरान समान ग्रेड सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है। डॉ. आले अली ने विद्यार्थियों को बताया कि यह उपकरण किसी भी निर्माण कार्य की बुनियाद के लिए आवश्यक है।

-इंडियन क्लिनोमीटर: डॉ. फरज़ाना अंजुम ने विद्यार्थियों को बताया कि यह उपकरण ढलान (झुकाव) या ऊँचाई के कोणों को मापने के लिए उपयोग किया जाता है। यह विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में और जल निकासी के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि जल सही दिशा में बह सके।

सर्वेक्षण प्रक्रिया

 

सर्वेक्षण के दौरान, सभी विद्यार्थियों ने डम्पी लेवल और इंडियन क्लिनोमीटर का उपयोग करके स्वर्ण रेखा बेसिन के आस-पास के क्षेत्र का विस्तृत अध्ययन किया। उन्होंने विभिन्न स्थानों से आंकड़े एकत्रित किए और उन आंकड़ों का विश्लेषण भी किया। इस प्रक्रिया ने विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं को समझने और उन्हें हल करने की क्षमता विकसित करने में मदद की।

 

निष्कर्ष

 

इस सर्वेक्षण ने विद्यार्थियों को भूगोल के व्यावहारिक पहलुओं को समझने का एक अनूठा अवसर प्रदान किया। डॉ. आले अली ने इस अवसर पर विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया कि वे आगे भी ऐसे सर्वेक्षणों में भाग लें, जिससे उनकी ज्ञानवर्धन और कौशल में वृद्धि हो सके। इस प्रकार के अनुभव न केवल शैक्षणिक विकास में सहायक होते हैं, बल्कि विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र में पेशेवर बनने के लिए भी तैयार करते हैं।

इस सर्वेक्षण ने यह स्पष्ट किया कि भूगोल का अध्ययन केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यावहारिक और महत्वपूर्ण विज्ञान है जो हमारे चारों ओर की दुनिया को समझने में मदद करता है।

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