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बांग्लादेश में हिंदुओं की रक्षा के लिए नागा साधुओं का कूच, भारत सरकार से मांगी अनुमति

न्यूज़ लहर संवाददाता
*नई दिल्ली:* बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ अब नागा साधु मोर्चा संभालने के लिए तैयार हैं। हजारों की संख्या में नागा साधु बांग्लादेश की ओर कूच करने के लिए इच्छुक हैं और इसके लिए उन्होंने भारत सरकार से अनुमति मांगी है।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार असहनीय हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भारत सरकार अनुमति देती है, तो नागा संन्यासी, जिनका जन्म सनातन धर्म की रक्षा के लिए हुआ है, हिंदुओं की सुरक्षा के लिए बांग्लादेश मार्च करने के लिए तैयार हैं।

हिंसा की पृष्ठभूमि

बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद कट्टरपंथियों ने हिंदुओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। तख्तापलट के बाद बनी अंतरिम सरकार के दौरान भी हिंदुओं पर हमले जारी हैं। हाल के दिनों में हिंदू घरों और मंदिरों पर लगातार हमले हुए हैं, जिससे संत समाज में आक्रोश फैल गया है।

महंत रविंद्र पुरी ने बताया कि पिछले मंगलवार (13 अगस्त) को हरिद्वार में हुई बैठक में साधु-संतों ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों पर चर्चा की। इसके बाद परिषद ने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा की निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र (United Nations) से एक प्रस्ताव पारित करने का आग्रह किया।

संयुक्त राष्ट्र को पत्र

महंत रविंद्र पुरी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को लिखे पत्र में कहा है कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे अपराधों पर पूरी दुनिया चुप है। उन्होंने उम्मीद जताई कि महासचिव परिषद के संतों की भावनाओं को समझेंगे और बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न पर नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे।

कट्टरपंथियों का आतंक

बांग्लादेश के कट्टरपंथी मुस्लिम समूहों ने देश के 27 जिलों में हिंदुओं का कत्लेआम किया है। उनके घरों और प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया है। दंगाइयों ने लूटपाट के बाद हिंदू बस्तियों में आग लगा दी और 50 से ज्यादा मंदिरों को नष्ट कर दिया।

बांग्लादेश डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार की रात को दंगाइयों ने हिंदुओं के घरों और दुकानों पर हमले किए। वे टोली बनाकर हिंदू बस्तियों पर धावा बोलते रहे, लोगों को पीटकर बाहर निकालते रहे और विरोध करने वालों को मार डाला।

इस स्थिति ने नागा साधुओं को बांग्लादेश में हिंदुओं की रक्षा के लिए आगे आने के लिए प्रेरित किया है, और अब उनकी नजरें भारत सरकार की अनुमति पर टिकी हैं।

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