चम्पाई सोरेन ने भाजपा का दामन थामा, बांग्लादेशी घुसपैठ को बताया गंभीर समस्या

न्यूज़ लहर संवाददाता
नई दिल्ली:झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने हाल ही में भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। उन्होंने अपने संबोधन में बांग्लादेशी घुसपैठ को आदिवासियों के लिए एक गंभीर खतरा बताया और इस मुद्दे पर भाजपा के नेतृत्व में संघर्ष करने का फैसला किया।
पत्र के माध्यम से जनता से की बात
सोरेन ने कहा कि पिछले हफ्ते (18 अगस्त) एक पत्र के माध्यम से उन्होंने झारखंड समेत पूरे देश की जनता के सामने अपनी बात रखी थी। इसके बाद वह लगातार झारखंड की जनता से मिलकर उनकी राय जानने का प्रयास करते रहे। उन्होंने कहा कि कोल्हान क्षेत्र की जनता हर कदम पर उनके साथ खड़ी रही और उन्होंने ही सन्यास लेने का विकल्प नकार दिया।
पार्टी में मंच का अभाव
सोरेन ने कहा कि पार्टी में कोई ऐसा फोरम/मंच नहीं था, जहां वह अपनी पीड़ा को व्यक्त कर पाते और मुझसे सीनियर नेता स्वास्थ्य कारणों से राजनीति से दूर हैं।
बांग्लादेशी घुसपैठ गंभीर समस्या
उन्होंने कहा कि आज बाबा तिलका मांझी और सिदो-कान्हू की पावन भूमि संथाल परगना में बांग्लादेशी घुसपैठ बहुत बड़ी समस्या बन चुका है। उन्होंने कहा कि जिन वीरों ने जल, जंगल और जमीन की लड़ाई में कभी विदेशी अंग्रेजों की गुलामी स्वीकार नहीं की, आज उनके वंशजों की जमीनों पर ये घुसपैठिए कब्जा कर रहे हैं। इनकी वजह से फूलो-झानो जैसी वीरांगनाओं को आदर्श मानने वाली माताओं, बहनों और बेटियों की अस्मत खतरे में है।
आदिवासियों पर पड़ रहा नुकसान
सोरेन ने कहा कि आदिवासियों एवं मूलवासियों को आर्थिक तथा सामाजिक तौर पर तेजी से नुकसान पहुंचा रहे इन घुसपैठियों को अगर रोका नहीं गया, तो संथाल परगना में हमारे समाज का अस्तित्व संकट में आ जायेगा। पाकुड़, राजमहल समेत कई अन्य क्षेत्रों में उनकी संख्या आदिवासियों से ज्यादा हो गई है।
सामाजिक आंदोलन की जरूरत
उन्होंने कहा कि राजनीति से इतर, हमें इस मुद्दे को एक सामाजिक आंदोलन बनाना होगा, तभी आदिवासियों का अस्तित्व बच पाएगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सिर्फ भाजपा ही गंभीर दिखती है और बाकी पार्टियां वोटों की खातिर इसे नजरअंदाज कर रही है।
भाजपा में शामिल होने का फैसला
इसलिए आदिवासी अस्मिता एवं अस्तित्व को बचाने के इस संघर्ष में, सोरेन ने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में आस्था जताते हुए भारतीय जनता पार्टी से जुड़ने का फैसला लिया है।
उन्होंने झारखंड के आदिवासियों, मूलवासियों, दलितों, पिछड़ों, गरीबों, मजदूरों, किसानों, महिलाओं, युवाओं एवं आम लोगों के मुद्दों एवं अधिकारों के संघर्ष वाले इस नए अध्याय में सभी का सहयोग मांगा है।