अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता अभियान: मानसिक शक्ति और चिकित्सा पर जोर

न्यूज़ लहर संवाददाता
झारखंड:जमशेदपुर में आनंद मार्ग यूनिवर्सल रिलीफ टीम ग्लोबल ने गदरा, राहरगोड़ा और बारीगोड़ा की बस्तियों में जरूरतमंद लोगों के बीच पौधों, कंबल और भोजन का वितरण कर एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश दिया। टीम के प्रमुख सुनील आनंद ने लोगों को अंधविश्वास से दूर रहने और मानसिक शक्ति बढ़ाने का संदेश दिया।
डायन प्रथा: एक मानसिक बीमारी
सुनील आनंद ने कहा कि डायन प्रथा एक अर्ध-विकसित समाज की मानसिक बीमारी है, जो अब प्राचीन सोच का प्रतीक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल अज्ञानता और अंधविश्वास का परिणाम है। समाज को चाहिए कि वह इस प्रकार की सोच से बाहर निकलकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाए।
झाड़-फूंक से सावधान रहने की अपील
आनंद ने लोगों से विषैले जीवों जैसे सांप और बिच्छू के काटने या बीमार होने पर झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि झाड़-फूंक से किसी की जान नहीं बचाई जा सकती, न ही किसी को मारा जा सकता है। ऐसे मामलों में तुरंत सरकारी अस्पताल में चिकित्सा करानी चाहिए।
मानसिक शक्ति और आत्मबल पर जोर
उन्होंने कहा कि जीवन में संघर्ष और दुख मनुष्य के अपने कर्म और संस्कारों का परिणाम हैं। इनसे पार पाने के लिए मानसिक शक्ति और आत्मबल की जरूरत होती है, जो परमात्मा के भजन और कीर्तन करने से प्राप्त होती है। उन्होंने कहा, “जब आत्मबल और भक्ति बढ़ती है, तो कोई भी मनुष्य को अंधविश्वास में नहीं फंसा सकता।”
तंत्र-मंत्र एक भ्रम
सुनील आनंद ने यह भी स्पष्ट किया कि तंत्र-मंत्र और ओझा-गुनी की शक्तियों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर उनके पास इतनी ही शक्ति होती, तो उन्हें बॉर्डर पर भेजकर दुश्मनों को मारने का काम दिया जाता। यह सब भ्रम और अंधविश्वास है, जिससे समाज को बचने की जरूरत है।”
जागरूक समाज की जरूरत
अभियान का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना और समाज को अंधविश्वास से मुक्त करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी मनुष्य परमात्मा की संतान हैं और किसी भी इंसान को तंत्र-मंत्र या झाड़-फूंक से कोई नुकसान नहीं पहुंच सकता। उन्होंने आत्मबल को मजबूत करने और भक्ति-कीर्तन के माध्यम से जीवन की कठिनाइयों से लड़ने की प्रेरणा दी।
यह अभियान सामाजिक जागरूकता और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने का एक सफल प्रयास साबित हुआ।