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सीरिया में बशर अल-असद का तख्तापलट: विद्रोहियों ने दमिश्क पर किया कब्जा

 

न्यूज़ लहर संवाददाता

सीरिया:सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल-असद का तख्तापलट हाल ही में विद्रोही गुटों द्वारा किए गए एक तेज़ और प्रभावी अभियान के परिणामस्वरूप हुआ है। विद्रोहियों ने 27 नवंबर से शुरू हुए संघर्ष के दौरान महज 11 दिनों में चार प्रमुख शहरों पर कब्जा कर लिया, जिसमें 8 दिसंबर को राजधानी दमिश्क का भी समावेश है। इस प्रक्रिया में, असद ने देश छोड़कर रूस की ओर रुख किया और वहां राजनीतिक शरण प्राप्त की है।

विद्रोह का त्वरित विकास

 

– **27 नवंबर** को विद्रोही गुटों ने सीरिया की सरकार के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। इस दौरान, उन्होंने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहरों पर तेजी से कब्जा करना शुरू किया।

– **8 दिसंबर** को विद्रोहियों ने दमिश्क पर नियंत्रण स्थापित किया, जिसके बाद असद ने इस्तीफा देकर मॉस्को की ओर उड़ान भरी।

 

– विद्रोही गुट हयात तहरीर अल-शाम ने इस दौरान कई बड़े शहरों पर कब्जा किया, जिसमें अलेप्पो और हमा शामिल हैं।

 

असद का पलायन और रूस में शरण

 

बशर अल-असद और उनके परिवार ने रूस पहुंचने के बाद वहां शरण ली है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उन्हें मानवीय आधार पर सुरक्षा प्रदान की है। पहले यह अटकलें थीं कि असद का विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया है, लेकिन बाद में पुष्टि हुई कि वे सुरक्षित रूप से रूस पहुंच गए हैं।

 

विद्रोहियों का जश्न

 

दमिश्क में विद्रोहियों द्वारा जीत का जश्न मनाया गया, जिसमें लोग सीरियाई क्रांतिकारी ध्वज लहरा रहे थे। यह दृश्य अरब स्प्रिंग के शुरुआती दिनों की याद दिलाता है, जब लोगों ने तानाशाही के खिलाफ उठ खड़े होने का साहस दिखाया था।

 

भविष्य की चुनौतियाँ

 

हालांकि असद का शासन समाप्त हो गया है, लेकिन सीरिया में स्थिति अभी भी जटिल बनी हुई है। विद्रोहियों के बीच आपसी मतभेद, साथ ही साथ बाहरी शक्तियों जैसे अमेरिका और रूस की भूमिका, देश के भविष्य को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, इजरायल की बढ़ती चिंताएँ भी इस क्षेत्र में तनाव बढ़ा सकती हैं।

इस प्रकार, बशर अल-असद का तख्तापलट न केवल उनके 50 साल के शासन का अंत है, बल्कि यह सीरिया के लिए एक नए युग की शुरुआत भी हो सकता है, जिसमें अनिश्चितता और संघर्ष की संभावनाएँ बनी रहेंगी।

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