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जमशेदपुर में यातायात पुलिस की मनमानी से आम जनता में बढ़ा रोष

 

न्यूज़ लहर संवाददाता

झारखंड:जमशेदपुर शहर में हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें यातायात पुलिस द्वारा वाहन जांच के नाम पर आम जनता का शोषण किया जा रहा है। एक घटना में मांगो गोलचक्कर पर एक वाहन चालक के साथ ऐसा ही हुआ। वाहन चालक ने बताया कि जब उसे सड़क पर रोका गया और दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, तब पुलिस ने बिना किसी वैध कारण के उसकी मोटरसाइकिल की चाबी जबरन निकाल ली। इस अप्रिय घटना के दौरान पुलिस और चालक के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि हाथापाई का सीन सामने आया और कुछ पुलिसकर्मी इस दौरान की वीडियो भी रिकॉर्ड करते नजर आए।

इस मामले में कानून के जानकारों का कहना है कि यातायात पुलिस का मुख्य उद्देश्य कानून व्यवस्था बनाए रखना होना चाहिए, न कि वाहन चालकों से जबरन चाबी निकालकर या फाइन वसूलने के नाम पर उनका शोषण करना। विशेषज्ञों का मानना है कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो पुलिस को यह अधिकार देता हो कि वह जबरन किसी भी वाहन की चाबी निकाल ले। यदि कोई चालक यातायात नियम तोड़ता है, तो उसे चालान काटकर या फाइल दर्ज कर उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही उसका पक्ष मुकदमे में रखा जाना चाहिए। कोर्ट में यदि चालक का पक्ष सही सिद्ध होता है तो आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ निर्धारित दंड या जुर्माना भी उसी प्रक्रिया के तहत लिया जा सकता है।

 

स्थानीय लोगों में इस घटना के बाद काफी नाराजगी फैली हुई है। आम जनता का मानना है कि यदि वाहन चालक की गलती सिद्ध होती है, तो उसे न्यायसंगत तरीके से चालान काटा जाना चाहिए, न कि जबरन उसके वाहन की चाबी निकालकर उसे धमकाया जाए। कई नागरिकों ने संबंधित अधिकारियों से इस मामले की गंभीर जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, कई अधिवक्ता और सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना को लेकर अपना निंदनीय रुख जाहिर किया है और अधिकारियों को आदेश दिया है कि यातायात पुलिस की मनमानी पर रोक लगाई जाए।

इस पूरे मुद्दे में यह स्पष्ट होता है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ पुलिस अधिकारियों को भी अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए नागरिकों के मौलिक अधिकारों का सम्मान करना चाहिए। यदि कोई भी पुलिस अधिकारी कानून से ऊपर उठकर किसी के अधिकारों का हनन करता है, तो उसे उचित कानूनी कार्रवाई का सामना करना चाहिए। नागरिकों को भी अपने अधिकारों के प्रति सजग रहना चाहिए और किसी भी अन्याय की स्थिति में उचित कदम उठाते हुए संबंधित प्राधिकारी या मानवाधिकार आयोग से शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

 

जमशेदपुर में इस तरह की घटनाओं के बाद न केवल यातायात पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिह्न लग रहे हैं, बल्कि यह भी जरूरी हो गया है कि कानून के प्रति सभी नागरिकों को जागरूक किया जाए। कानून का पालन और नागरिकों के अधिकारों का सम्मान ही एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज की नींव है, जहां पुलिस और जनता के बीच विश्वास और सहयोग बना रहे।

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