चैती छठ महापर्व के तीसरे दिन व्रती महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्पित किया अर्घ्य, उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने से होगा पर्व का समापन*

न्यूज़ लहर संवाददाता
झारखंड:चाईबासा में लोक आस्था का चार दिवसीय चैती छठ महापर्व अपने तीसरे दिन में प्रवेश कर गया, जिसमें व्रती महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। यह पर्व विशेष रूप से संतान सुख और उनकी लंबी उम्र के लिए माताओं द्वारा श्रद्धा और आस्था के साथ किया जाता है। शुक्रवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही चैती छठ महापर्व का समापन होगा।
आज गुरुवार को पहले अर्घ्य के दिन व्रती महिलाओं ने करणी मंदिर नदी, पुल्हातु नदी और रोरो नदी जैसे प्रमुख जल स्रोतों पर जाकर श्रद्धापूर्वक अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया।
इस दिन का महत्व विशेष रूप से इस बात से है कि यह दिन छठ पूजा के प्रमुख अनुष्ठानों में से एक है, जो जीवन और स्वास्थ्य के प्रति आस्था का प्रतीक होता है।
चैती छठ की मान्यता बहुत अधिक है, खासकर जब यह पर्व चैत्र नवरात्रि के छठे दिन पड़ता है। यही कारण है कि इस पर्व को खास तौर पर माताएं करती हैं। इस पर्व की विशेषता यह है कि पहले दिन “नहाय-खाय” की रस्म निभाई जाती है, जिसमें व्रती महिलाएं पवित्र जल से स्नान करके शुद्ध भोजन ग्रहण करती हैं। दूसरे दिन “खरना” की पूजा होती है, जिसमें छठव्रती गुड़ और चीनी से बने खीर का सेवन करती हैं। इसके बाद 36 घंटे का निर्जला उपवास आरंभ होता है, जो उगते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ समाप्त होता है।
इस महापर्व में श्रद्धालु परिवार और समाज के लिए सुख, समृद्धि, और खुशहाली की कामना करते हैं, और साथ ही अपने संतान के स्वास्थ्य और लंबी उम्र की प्रार्थना करते हैं।
अब इस पर्व का समापन उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ होगा, जो चैती छठ महापर्व की परंपराओं को पूरी श्रद्धा और धैर्य के साथ संपन्न करने का संकेत है।