अंधारझोर के शिल्पकारों से मिले उपायुक्त, कहा – पारंपरिक कला को बाजार, पहचान और नई पीढ़ी से जोड़ना प्राथमिकता

न्यूज़ लहर संवाददाता
जमशेदपुर।पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन स्थानीय शिल्पकारों की पारंपरिक कला को प्रोत्साहित करने, उनकी आय बढ़ाने और युवाओं को इससे जोड़ने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में सोमवार को उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी बोड़ाम प्रखंड के सुदूर अंधारझोर गांव पहुंचे और वहां के शिल्पकारों से मुलाकात की। इस दौरान उनके साथ बीडीओ और सीओ भी मौजूद रहे। उपायुक्त ने शिल्पकारों से तबला, मांदर, ढोल, मृदंग जैसे वाद्ययंत्रों के निर्माण में लगने वाले समय, लागत, कच्चे माल की उपलब्धता, बाजार की मांग और बिक्री मूल्य के बारे में विस्तार से जानकारी ली।
ग्रामीणों ने बताया कि करीब 70 परिवारों वाले इस गांव में कई पीढ़ियों से शिल्पकला संरक्षित है, लेकिन लागत के अनुरूप उचित मूल्य नहीं मिलने और बाजार की कमी के कारण अब युवा इस पेशे में दिलचस्पी खो रहे हैं और कम आमदनी के चलते अन्य कामों की ओर भी रुख कर रहे हैं। शिल्पकारों ने बताया कि पूर्व में भी जिला प्रशासन के सहयोग से उन्हें लाभ मिला है लेकिन इस सहयोग को और आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
उपायुक्त ने आश्वासन दिया कि शिल्पकारों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने, उनकी ब्रांडिंग, लोगो और ट्रेडमार्क कराने के लिए ठोस पहल की जाएगी। उन्होंने उद्योग विभाग के प्रतिनिधियों को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। साथ ही बीडीओ और सीओ को निर्देशित किया कि बोड़ाम-अंधारझोर मुख्य सड़क के आसपास सरकारी जमीन चिन्हित कर कम्यूनिटी फैसिलिटी सेंटर (CFC) निर्माण का प्रस्ताव जल्द भेजा जाए ताकि ग्राहकों को शिल्पकारों तक पहुंचने में सुविधा हो और स्थानीय शिल्पकार भी इसका लाभ उठा सकें।
अंधारझोर से लौटने के बाद उपायुक्त सीधे साकची बाजार पहुंचे और संजय मार्केट के पास बने विश्वकर्मा प्वाइंट का निरीक्षण किया। उन्होंने शिल्पकारों के लिए बने शेड को पक्का निर्माण कराने का निर्देश दिया। साथ ही जिला उद्यमी समन्वयक को अंधारझोर के शिल्पकारों को प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का लाभ दिलाने का आदेश दिया। उपायुक्त ने गांव की महिलाओं को जेएसएलपीएस और आरसेटी के तहत प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ने का भी निर्देश दिया। उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन हर संभव सहयोग के लिए तत्पर है ताकि पारंपरिक कला संरक्षित रहे और इससे नई पीढ़ी को भी आजीविका का बेहतर अवसर मिल सके।