मत्स्य पालन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल, केरूकोचा के प्रगतिशील किसानों से मिले उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी

जमशेदपुर।पूर्वी सिंहभूम जिला में गुरुवार को चाकुलिया प्रखंड अंतर्गत केरूकोचा गांव में जिला उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान प्रगतिशील मत्स्यपालकों से संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने मत्स्य पालन की तकनीकी जानकारी ली और किसानों की समस्याओं व अनुभवों को समझा। उन्होंने इसे ग्रामीण क्षेत्र की आर्थिकी सुदृढ़ करने का एक प्रभावी माध्यम बताते हुए अन्य किसानों को भी इससे जुड़ने का आग्रह किया।
केरूकोचा गांव में वर्तमान में 8 प्रगतिशील किसान सरकारी सहायता से बड़े स्तर पर मत्स्य पालन कर रहे हैं। इनमें से 3 किसान 25-25 बायोफ्लॉक टैंक का सफल संचालन कर रहे हैं, जबकि एक किसान ने रिस्पॉयरेटरी एक्वा कल्चर के 8 टैंक लगाए हैं। वहीं एक अन्य किसान ने 7 टैंक के छोटे बायोफ्लॉक यूनिट की स्थापना की है, और एक किसान ने 4 टैंकों से मत्स्य पालन की शुरुआत की है। इसके अतिरिक्त, एक किसान ने बायोफ्लॉक तालाब के साथ-साथ फीड मिल की भी स्थापना कर स्थानीय स्तर पर उत्पादन और आय सृजन का मार्ग प्रशस्त किया है। ये सभी योजनाएं वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2023-24 के बीच क्रियान्वित की गई हैं।
उपायुक्त सत्यार्थी ने इन मत्स्यपालकों की सराहना करते हुए कहा कि केरूकोचा गांव के किसानों ने आत्मनिर्भरता की दिशा में अनुकरणीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि जिले के अन्य किसान भी इन मॉडलों को अपनाकर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। साथ ही, उन्होंने जिला मत्स्य पदाधिकारी को निर्देशित किया कि मत्स्य पालन संबंधी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण इस व्यवसाय से लाभान्वित हो सकें।
उपायुक्त ने यह भी निर्देश दिया कि फीड मिल योजना के तहत नए किसानों को जोड़ा जाए ताकि स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाया जा सके और रोजगार के नए अवसर सृजित हों। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत बायोफ्लॉक टैंक, पॉन्ड निर्माण, फीड मिल जैसी सुविधाओं पर अनुदान दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को इस व्यवसाय में आने के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि कृषि के पारंपरिक तरीकों के साथ मत्स्य पालन जैसे आय सृजन के वैकल्पिक साधनों को अपनाकर किसान अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर सकते हैं। जिला प्रशासन किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को लेकर सतत प्रयासरत है, और मत्स्य पालन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस अवसर पर संबंधित विभागों के पदाधिकारी, मत्स्य पालक किसान और स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।