डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची में द्वितीय राज भाषा दिवस की 14वीं वर्षगांठ मनाई गई

रांची: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची के हो भाषा विभाग द्वारा द्वितीय राज भाषा दिवस की 14वीं वर्षगांठ बड़े धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ विभाग के छात्रों द्वारा सामूहिक रूप से हेरो: लोकगीत गाकर किया गया। इस अवसर पर जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के समन्वयक डॉ. बिनोद कुमार भी उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथियों में हो विभाग के सहायक प्राध्यापक चाईबासा के दिलदार पुरती, सहायक प्राध्यापक डॉ. जय किशोर मंगल, संताली विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. डुमनी माई मुर्मू और सहायक प्राध्यापक संतोष मुर्मू ने कार्यक्रम में भाग लिया।
डॉ. जय किशोर मंगल ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि जब तक हम अपनी मातृभाषा का प्रयोग स्वयं से शुरू नहीं करेंगे, तब तक उसकी रक्षा और संवर्धन संभव नहीं है। उन्होंने सभी से हो भाषा को घरों से लेकर दफ्तरों तक उपयोग में लाने की अपील की।
कार्यक्रम में छात्रा जिंगी कोड़ः ने स्वरचित कविता प्रस्तुत कर समां बांध दिया। वहीं, हो विभाग के स्नातकोत्तर में गोल्ड मेडलिस्ट रहे पूर्व छात्र कृष्ण हेम्ब्रोम ने भी अपनी मातृभाषा पर कविता प्रस्तुत की।
डॉ. डुमनी माई मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि अपनी मातृभाषा के साथ-साथ अन्य भाषाओं का ज्ञान भी जरूरी है, जबकि सहायक प्राध्यापक संतोष मुर्मू ने इसे मातृ दुग्ध के समान बताते हुए इसके प्रचार-प्रसार को हमारी जिम्मेदारी बताया।
समन्वयक डॉ. बिनोद कुमार ने कहा कि भाषा हमारी मूल पहचान है, और वर्तमान में हो भाषा केवल कोल्हान तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना चुकी है।
मंच संचालन विभाग के पूर्व छात्र सिकंदर होनहागा ने किया। सहायक प्राध्यापक दिलदार पुरती ने अपने स्वरचित कविता से संबोधन का आगाज किया और कहा कि भाषा का संरक्षण तभी संभव है जब उसे सरकारी और गैर-सरकारी स्तरों पर रोजगार से जोड़ा जाए।
इस अवसर पर हो भाषा विभाग के कई छात्र-छात्राएं उपस्थित थे, जिनमें तान्या दोराई, कृष्णा हेम्ब्रोम, सिकंदर होनहागा, सुरेश हेस्सा, गोसनाथ पुरती, सतारी कुंकल, जिंगी कोड़ः, सुमित्रा सिंकु, सोना कोड़ः, सुनिता तुबिड्, सुमन हाइबुरु, सविता डांगिल, सोमनाथ गागराई, पूनम गागराई, कृष्णा हांसदा, मनीषा बारी, मेरी पियर्स सुंडी, राज तियु, खुशबु गागराई, करुणा गागराई, शिशिर गागराई, सावित्री बोदरा आदि शामिल थे।