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हो’ भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की माँग को लेकर बैठक

 

चाईबासा: आदिवासी ‘हो’ समाज की भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की पुरानी माँग के समर्थन में नई दिल्ली में आयोजित होने वाले दो-दिवसीय सेमिनार और धरना कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर सर्किट हाऊस चाईबासा में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में नई दिल्ली दिशुम सोसायटी के अध्यक्ष के के जामुदा, मानकी-मुण्डा संघ के अध्यक्ष गणेश पाट पिंगुवा, और आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा के पदाधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक में आगामी कार्यक्रम के लिए की जा रही तैयारियों पर चर्चा की गई। 31 अक्टूबर 2025 को सेमिनार और 01 नवंबर 2025 को धरना कार्यक्रम की सफलता को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न व्यवस्थाओं पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम के तहत ठहरने, सेमिनार के लिए हॉल बुकिंग, नाश्ता-भोजन, साऊंड टेन्ट, यातायात, फ्लैक्स-बैनर और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं की योजनाओं पर चर्चा की गई।

इसके अतिरिक्त, ‘हो’ भाषा आंदोलन की वर्तमान परिस्थितियों और सामाजिक-राजनीतिक हालातों को भी बैठक में रखा गया, और कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी से सहयोग की अपील की गई।

बैठक में आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष इपिल सामड, महासचिव गब्बरसिंह हेम्ब्रम, कोषाध्यक्ष सुरेन्द्र पुरती, संयुक्त सचिव रवि बिरूली, प्रदेश कोषाध्यक्ष शंकर सिधु, जिलाध्यक्ष शेरसिंह बिरूवा, सदस्य सिकंदर तिरिया, और ऑल इंडिया ‘हो’ लैंग्वेज एक्शन कमिटी के सह कोषाध्यक्ष सोना सेलेम हासदा उपस्थित थे।

कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी ने एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया और आशा व्यक्त की कि इस आंदोलन से ‘हो’ भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।

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