Regional

हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी 9 वर्षों से जमीन पर अवैध कब्जा बरकरार*

 

चाईबासा: कुमारडुंगी प्रखंड कुमारडुंगी गांव निवासी रैयत पुरनो गागराई को झारखंड हाईकोर्ट रांची में डिक्री करने व एलआरडीसी सदर के आदेश के बावजूद उनकी जमीन पर नौ वर्ष बाद भी दखल नहीं दिलाया जा सका है। अब कोल्हान भूमि बचाओ समिति ने इसकी लिखित शिकायत जिले के उपायुक्त चंदन कुमार से की है। समिति के अध्यक्ष विनोद कुमार सावैयां ने इस संबंध में आवेदन देकर जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कर उसपर पुरनो गागराई को दखल दिलाने की मांग की है। सौंपे आवेदन में श्री सावैयां ने बताया है कि कुमारडुंगी प्रखंंड के मौजा कुमारडुंगी के आदिवासी रैयत पुरनो गागराई, पिता स्वर्गीय मंचुड़िया गागराई की 0.40 एकड़ जमीन पर गैर आदिवासी लालदेव गिरी का अवैध कब्जा है। इस जमीन की खाता संख्या 299, प्लॉट संख्या 1756, रकवा 0.40 एकड़ है। जबकि इस इस जमीन विवाद में 2016 में झारखंड हाईकोर्ट रांची ने रैयत पुरनो गोप के पक्ष में फैसला सुनाया था। एलआरडीसी सदर चाईबासा की कोर्ट ने भी 2001 में पुरनो गागराई के ही पक्ष में निर्णय दिया था। बावजूद आजतक पुरनो गागराई को दखल नहीं दिलाया जा सका है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। लिहाजा पुरनो गागराई को झारखंड हाईकोर्ट के आदेश 14/दिनांक 19 मई 2016 एवं एलआरडीसी चाईबासा एसआरए वाद संख्या 8/90-91, दिनांक 9 नवंबर 2001 के डिक्री आदेश के आलोक में यथाशीघ्र जमीन पर दखल दिलाया जाये। इस संबंध में आदेश की कॉपी तत्कालीन उपायुक्त चाईबासा, अपर उपायुक्त चाईबासा, भूमि सुधार उप समाहर्ता, अंचलाधिकारी कुमारडुंगी तथा थाना प्रभारी कुमारडुंगी को भी प्रेषित किया जा चुका है। यदि मांग पूरी नहीं हुई तो रैयतों के साथ आंदोलन किया जायेगा।

पीड़ित पुरनो गागराई ने कहा कि केस जीतने के बाद उसने कुमारडुंगी अंचल कार्यालय व थाना कुमारडुंगी से जमीन पर दखल दिलाने की मांग की थी। लेकिन इसपर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब डीसी से उम्मीद है।

*शिकायत के पूर्व रैयतों ने की बैठक*

डीसी से शिकायत के पहले कुमारडुंगी में रैयतों की बैठक विनोद कुमार सावैयां की अध्यक्षता में हुई। इसमें श्री सावैयां ने कहा कि रैयत को हाईकोर्ट में डिक्री करने के बावजूद दखल नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। अब कोल्हान भूमि बचाओ समिति इसकी शिकायत कर दखल दिलवायेगी। बैठक में दुईला गागराई, चेंगदू महाराणा, डिबरू गागराई, श्रीधर गागराई, पादरी पुरती, शंकर लाल सिंकू, रवींद्र सिंकू, चाड़ा महाराणा, सुखदेव महाराणा, जुगी महाराणा, राऊतु राय सिंकू, नीलू महाराणा आदि मौजूद थे।

Related Posts