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सूर्यधाम में संगीतमय श्रीराम कथा: भरत मिलाप के भावुक प्रसंग पर श्रद्धालु हुए भाव-विह्वल

 

न्यूज़ लहर संवाददाता

झारखंड:जमशेदपुर के सिदगोड़ा सूर्य मंदिर समिति द्वारा श्रीराम मंदिर स्थापना की पंचम वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के छठे दिन, गुरुवार को कथा व्यास आचार्य राजेंद्र जी महाराज ने श्रीराम वनगमन, केवट प्रसंग एवं भरत मिलाप का हृदयस्पर्शी वर्णन किया। कथा सुनते हुए श्रद्धालु भाव-विह्वल हो गए, विशेषकर जब उन्होंने “रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई” का प्रसंग सुनाया।

श्रीराम-भरत के प्रेम ने पिघलाए श्रद्धालुओं के हृदय

 

कथा व्यास राजेंद्र जी महाराज ने कहा कि श्रीराम और भरत ने संपत्ति का नहीं, बल्कि विपत्ति का बंटवारा किया। आज के युग में भाई-भाई संपत्ति बांटने में लगे हैं, जबकि राम-भरत ने त्याग और भक्ति की मिसाल पेश की।

उन्होंने बताया कि कैसे मंथरा की कुसंगति के कारण माता कैकयी की बुद्धि भ्रमित हुई और उन्होंने श्रीराम के लिए वनवास मांग लिया। लेकिन भगवान राम ने पिता के वचन की रक्षा के लिए इसे सहर्ष स्वीकार किया।

वनगमन के दौरान केवट ने श्रद्धाभाव से भगवान राम के चरण धोकर उन्हें गंगा पार कराया। बदले में उसने भवसागर पार कराने का आशीर्वाद मांगा। इसके बाद चित्रकूट में भरत और श्रीराम का भावुक मिलन हुआ। भरत जी ने श्रीराम से अयोध्या लौटने की प्रार्थना की, लेकिन भगवान ने पिता के वचन का मान रखते हुए 14 वर्षों का वनवास पूरा करने का निर्णय लिया। अंततः भरत जी ने रामजी की चरण पादुकाएं सिंहासन पर स्थापित कर स्वयं तपस्वी जीवन अपनाया।

श्रीराम कथा का शुक्रवार को होगा समापन

 

शुक्रवार को कथा के अंतिम दिन श्रीराम के राज्याभिषेक और फूलों की होली का विशेष आयोजन किया जाएगा। दोपहर 3 बजे से कथा प्रारंभ होगी।

 

विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति

 

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं सूर्य मंदिर समिति के मुख्य संरक्षक रघुवर दास, संरक्षक चंद्रगुप्त सिंह, प्रभात खबर के संपादक संजय मिश्रा, जमशेदपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष संजीव भारद्वाज, मंदिर समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, महासचिव अखिलेश चौधरी, और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

संपूर्ण कार्यक्रम का कुशल संचालन

 

कथा मंच का संचालन सूर्य मंदिर समिति के वरिष्ठ सदस्य गुंजन यादव ने किया। इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और श्रीराम कथा के पावन प्रसंगों का रसास्वादन किया।

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