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क्या होता हैँ पंचक?? ज्योतिष क्या कहता है??

 

आनंद शर्मा
ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ
9835702489

ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ श्री आनंद शर्मा जी बताते हैँ कि 27 नक्षत्र होते हैँ जो कि अश्वनी से लेकर रेवती और मेष से लेकर मीन तक के स्वामी होते हैँ

इन्ही 27 नक्षत्र मे अंतिम 5 नक्षत्र पंचक कहलाते हैँ
जिसमे

धनिष्ठा
शतभीषा
पूर्वभद्रापद
उत्तराभद्रापद
रेवती

ये पांच नक्षत्र पंचक कि श्रेणी मे आते हैँ

पंचक 6 प्रकार के होते हैँ
1. रोग पंचक -रविवार दिन हो और लिखे गए 5 नक्षत्रो मे कोई भी नक्षत्र हो तो रोग पंचक लगता हैँ इस दिन रोग सम्बंधित कार्य नहीं करना चाहिए जैसे सर्जरी, डॉ बदलना

2. राज पंचक – सोमवार दिन को लगने वाला पंचक राज पंचक कहलाता हैँ ये एक शुभ पंचक होता हैँ किंतु मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए
3. अग्नि पंचक – मंगलवार को लगने वाला पंचक को अग्नि पंचक कहा जाता हैँ इसमें अग्नि सम्बंधित घटना दुर्घटना होने कि सम्भावना बनी रहती हैँ

नोट :- 6. गुरुवार और बुधवार को पंचक दोष नहीं लगता हैँ

4. चोर पंचक – शुक्रवार को लगने वाला पंचक को चोर पंचक कहा जाता हैँ अपने सामान का ध्यान रखे

5 मृत्यु पंचक -शनिवार को लगने वाले पंचक को मृत्यु पंचक कहा जाता हैँ विवाह के कार्य मे इस पंचक मे मनाही होती हैँ

पंचक मे क्या क्या नहीं करना चाहिए

छत निर्माण, मरम्मत
काष्ट, लकड़ी के काम
पलंग चारपाई, रुई, तकिया गद्दे बनवाना
दक्षिण दिशा कि यात्रा
जलावन लकड़ी या ज्वलन शील चीज़ो का संग्रह

अन्य शुभ अशुभ का विचार जातक के कुंडली के अनुसार नवतारा चक्र मे बने योग के अनुसार किया जाता हैँ
उसी अनुसार अन्य मांगलिक कार्य पंचक मे भी किया जा सकता हैँ जैसे मुंडन, जानेव, गृहप्रवेश, विवाह आदि

प्रत्येक व्यक्ति कि कुंडली अलग होती यही तो पंचांग से निर्णय लेकर ही मांगलिक कार्य करना सही रहता हैँ

 

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