रोंगटे खड़े करने वाले मामले का खुलासा, हवस के लिए महिलाओं को उठाकर ले जाते हैं TMC नेता हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, भाजपा का दल तथ्य को जांच ने पहुंचा
न्यूज़ लहर संवाददाता
पश्चिम बंगाल: संदेशखाली गांव से रोंगटे खड़ा करने वाले मामले का खुलासा हुआ। जहां सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी के नेता पर बहुत गंभीर आरोप लगा है।अनेक पीड़ित महिलाओं ने मीडिया और सार्वजनिक तौर पर अपने बात रखी है। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि टीएमसी नेता अपने हवस के लिए महिलाओं को उठाकर पार्टी कार्यालय में लेजाकर दुष्कर्म करते हैं। यहां उनको अनेक दिनों तक रखा जाता है।इस घटना से पश्चिम बंगाल सहित पूरे देश में हंगामा मच गया है। पश्चिम बंगाल हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। वहीं भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल जांच के लिए संदेशखाली गांव भेजा है।इसको भी लेकर हंगामा मच गया है।
टीएमसी कार्यकर्ताओं के ऊपर जो आरोप लगा है वो न सिर्फ एक पार्टी के लिए बेहद शर्मिंदगी भरी बात है बल्कि एक इंसानियत के लिए भी और एक सभ्य समाज के लिए बेहद शर्मिंदगी वाली बात है। यहाँ पर टीएमसी कार्यकर्ताओं के ऊपर ये आरोप लगा है कि वे सर्वेक्षण के बहाने घर घर जाकर देखते हैं और जो भी खूबसूरत महिला और लड़की मिलती है उसे उठाकर ले जाते हैं और वे उसे रात तक रखते हैं। जब तक संतुष्ट नहीं हो जाते हैं और उनके साथ शारीरिक संबंध स्थापित करते हैं|
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार है जो कि सत्ताधारी दल टीएमसी से ताल्लुक रखती हैं। यही उत्तर 24 परगना स्थित संदेशखाली नाम का एक स्थान है जो कि एक गांव है।यहाँ पर पिछले महीने से देश और दुनिया की नजरें टिकी हुई है। क्योंकि यहाँ पर ऐसी बातें सामने आ रही है जो कि कभी भी किसी सभ्य समाज के लिए स्वीकार्य नहीं की जा सकती है|
कथित तौर पर टीएमसी कार्यकर्ताओं के उपर तथा वहाँ के स्थानीय नेताओं के ऊपर यह आरोप लगा है कि महिलाओं का वो चरम सीमा तक यौन उत्पीड़न करते हैं और इसी के विरोध में यह प्रदर्शन किया जा रहा है। इसकी शुरुआत 5 जनवरी की सुबह को हुई थी, जब करोड़ों रुपये के राशन वितरण के घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ईडी ने तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर ताकतवर और दबंग नेता शाहजहाँ शेख के संदेशखली स्थित घर पर छापेमारी की थी।जहाँ पर समर्थकों के द्वारा न सिर्फ ईडी के अधिकारियों को मारा पीटा गया था। बल्कि ईडी के अधिकारियों की जान से मारने का प्रयास किया गया। ईडी के अधिकारी किसी तरह से वहाँ पर से जान बचाकर निकले थे। बाद में केंद्रीय जांच एजेंसी की टीम के सदस्यों के शहर से लगभग 74 किलोमीटर दूर गांव तक पहुंचते-पहुंचते मारपीट की गई जिले के बशीर घाट मंडल के अंतर्गत आने वाले संदेशखाली से जिला परिषद सदस्य शाहजहाँ तब से गायब है। लेकिन उसके करीबियों ने दावा किया है इलाके पर अब भी उसका दबदबा बना हुआ है|
आदिवासीयों के जमीनों पर भी किया अतिक्रमण
घटना के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं सड़क पर आ उतरी और उन्होंने आरोप लगाया है कि शाहजहाँ और उसके दबंग दलाल झींगे की खेती के लिए जबरन उनकी जमीन पर कब्जा कर लेते हैं। उनको वर्षों से प्रताड़ित कर रहे हैं।उनका यौन उत्पीड़न भी किया जा रहा है। पीड़ित महिलायें इस बात को पहले ही बताने का प्रयास करती थी ,लेकिन टीएमसी पार्टी की सरकार है और पूरी तरह से शाहजहाँ का चारों तरफ दबदबा छाया हुआ है इसलिए उसके खिलाफ़ में कोई कार्रवाई हो नहीं सकी। जब ईडी की कार्रवाई हुई तब महिलाओं को हिम्मत मिली और वो सड़कों पर उतर आईं उन्होंने ये आरोप शाहजहाँ की ऊपर लगाये।
महिलाओं के द्वारा टीएमसी कार्यकर्ताओं पर लगाए गए हैं ये मुख्य आरोप
संदेशखाली गांव की महिलाओं के द्वारा शाहजहाँ के आदमियों और टीएमसी कार्यकर्ताओं पर तथा स्थानीय नेताओं पर यह आरोप लगाया गया है की ये पहचान छिपाने के लिए एक स्कार्फ का उपयोग करते हैं और घर-घर जाकर सर्वेक्षण करते हैं। जो भी खूबसूरत महिला या यूवती या लड़की होती हैं उन्हें उठाकर पार्टी कार्यालय लेकर जाते हैं। वे महिला को उस रात तक शारीरिक संबंध बनाने के लिए रखते हैं जब तक कि वह पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हो जाते। महिलाओं ने इतना ही नहीं बताया उन्होंने कहा कि शाहजहाँ के फरार होने से उन्हें पिछले कई सालों से जारी उत्पीड़न के खिलाफ़ आवाज उठाने की हिम्मत मिली। उन्होंने जब जब इसके खिलाफ़ आवाज उठाने की थोड़ी भी कोशिश की शाहजहाँ ने इसे पूरी तरह से दबा दिया। महिलाओं ने यह भी बताया है कि इस पूरे अपराध में शाहजहाँ ही नहीं बल्कि उसका कथित साथी और तृणमूल के दूसरे नेता उत्तम सरदार और शिव प्रसाद हजारा भी बराबर के हिस्सेदार भी वही करते है जो शाहजहाँ कहता है|
पति का नहीं होता है पत्नी पर कोई अधिकार
संदेशखाली की महिलाओं ने यह आरोप लगाया है कि भले ही किसी महिला का पति हो लेकिन उस पर उसका कोई अधिकार नहीं होता है। उसे अपनी पत्नी को छोड़ना होता है। हम यहाँ रहने में असमर्थ है।अत्याचार या यौन उत्पीड़न का डर हमेशा बना रहता है।महिलाओं ने कहा की हम सुरक्षा चाहते हैं ।हमारे ज्यादातर आदमी गांव छोड़कर दूसरे राज्यों में काम कर रहे हैं और रोज़ी-रोटी की तलाश में वो लंबे समय तक बाहर ही रहते हैं।लेकिन हमें यहाँ पर किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है उसे हम ही जानते हैं। हम किसी से ना कह सकते हैं नहीं कोई हमारी बात सुनता है। पुलिस से तो किसी भी प्रकार की मदद की कोई उम्मीद ही नहीं की जा सकती|
महिला झाड़ू और लाठी के साथ प्रदर्शन कर रही हैं और तत्काल शाहजहाँ और शिव प्रसाद हजारा की गिरफ्तारी की मांग को लेकर स्थानीय पुलिस थाने का घेराव कर रही है। पुलिके की कार्यवाही से सभी महिलाएं कोई ज्यादा खुश नहीं है ,क्योंकि शाहजहाँ आसपास का दबंग व्यक्ति हैं। इसलिए पुलिस भी उसके खिलाफ़ करने से डरती है।इन आरोपों को लेकर राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है और पिछले शुक्रवार को तनाव तब बढ़ गया है।जब महिलाओं ने हजारे के तीन पोल्ट्री फर्म में आग लगा दी। महिलाओं ने आरोप लगाया था कि उन्हें ग्रामीणों की जमीन पर जबरन कब्जा करके बनाया गया है ये उनकी जमीन है जिससे वे खाली कराना चाहते हैं|
महिलाओं के समर्थन में उतरीं विपक्षी पार्टियां
पश्चिम बंगाल में विपक्षी पार्टी जिसमें कि भारतीय जनता पार्टी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस पर शाहजहाँ और उसके साथियों का पूर्ण रूप से पक्ष लेकर बचाव करने का आरोप लगाया है। वहीं तृणमूल के नेताओं ने दावा किया कि विपक्षी पार्टियों ने आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र गलत तरीके से शाहजहाँ को फंसाया है|
हो सकता है ये दावा सही हो सकता है लेकिन उन महिलाओं को ऐसी क्या जरूरत आन पड़ी कि वे शाहजहाँ को फंसाने के लिए एक साथ अपनी इज्जत को दांव पर लगाएंगे, नेताओं के द्वारा ये जो बातें कही जा रही है वे सिर्फ लोगों को मैनिप्युलेट करने के लिए कही जा रही है क्योंकि ऐसा कभी नहीं होता की एक साथ इतनी महिलाएं किसी एक व्यक्ति के खिलाफ़ उठ खड़ी हों|
फिलहाल आपको बता दें की महिलाओं के प्रदर्शन के मद्देनज़र पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस को इस सप्ताह की शुरुआत में अपना केरल दौरा बीच में ही छोड़कर पश्चिम बंगाल लौटना पड़ा, ताकि संदेशखाली की स्थिति की समीक्षा की जा सके।महिलाओं से बात करते समय बोस ने इसे भयावह स्तब्ध करने वाला और छिन्न भिन्न करने वाला करार दिया है। बॉस ने कहा “संदेशखाली का दौरा करने के बाद बोस ने कहा जो मैंने देखा वह अत्यंत भयावह है। इस स्तब्ध करने वाला और छिन्न भिन्न कर देने वाला कभी नहीं देखना चाहिए था।मैंने ऐसी बहुत सी बातें सुनी जो मुझे कभी नहीं सुनना चाहिए था या सब समाज के लिए शर्मनाक है”
केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंपी अपनी रिपोर्ट
इसी के साथ पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बोस ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंपी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि संदेशखाली में कानून व्यवस्था संभालने के जिम्मेदार लोगों की उपद्रवी तत्वों से सांठगांठ है|उन्होंने यह भी बताया कि रिपोर्ट में राज्यपाल ने कहा कि स्थानीय लोग आरोपों की जांच के लिए विशेष कार्यबल या विशेष जांच टीम चाहते हैं|
ममता बनर्जी ने भी दी अपनी प्रतिक्रिया
इसी के साथ इस घटना पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रतिक्रिया दे दिया है कि जो लोग जिम्मेदार थे उन्हें सलाखों के पीछे डाल दिया गया है। इसका मतलब ये निकलता है कि वे भी इस बात को मान रही हैं की महिलायें सही कह रही हैं।उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति पर बारीकी से नजर रखी जा रही है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। ममता बनर्जी का बयान उस दिन आया था जब पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बोस संदेशखाली गए थे और वहाँ कानून व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा कर रहे थे|
पुलिस ने इनको किया गिरफ्तार
पुलिस ने आरोपियों पर संदेशखाली के पूर्व माकपा विधायक और एक स्थानीय भाजपा नेता विकास सिंह को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा बशीरघाट पुलिस ने सोमवार को यह भी दावा किया है कि उसे प्रभावित लोगों से केवल चार शिकायतें मिली हैं। उनमें से किसी ने भी बलात्कार या नहीं किया है।संदेशखाली में पुलिस के द्वारा निषेधाज्ञा को लागू कर दिया गया है। महिला राज्य आयोग भी वहाँ पर जाकर जांच कर चुका है और अपनी रिपोर्ट उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपी है।इसके अतिरिक्त इस घटना की जांच करने के लिए भारतीय पुलिस सेवा के वरीष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में 10 सदस्यीय टीम का गठन किया गया है।राष्ट्रीय महिला आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के प्रतिनिधियों ने भी संदेशखाली जाने की कोशिश की लेकिन उन्हें पुलिस की प्रतिवाद का सामना करना पड़ा। जिन्होंने निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए कहा कि उनके दौरे से क्षेत्र में कानून और व्यवस्था की समस्या पैदा हो जाएगी। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के एक प्रतिनिधिमण्डल ने बृहस्पतिवार को समस्याग्रस्त गांवमें पहुंचने का दावा किया|
पश्चिम बंगाल के हाईकोर्ट ने भी लिया संज्ञान
इसके अतिरिक्त पश्चिम बंगाल के हाईकोर्ट ने भी इस विषय में संज्ञान लिया है। कलकत्ता उच्च न्यायालय के ने मंगलवार को स्थानीय महिलाओं के यौन उत्पीड़न और आदिवासियों की जमीन पर जबरन कब्जा करने अतिक्रमण करने के आरोपों पर मंगलवार को स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को एक सप्ताह में इस घटना पर की गई कार्रवाई एवं विस्तृत जानकारी के समेत रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है।इसके अलावा सेंट्रल गवर्नमेंट भी लगातार इस पर नजर बनाए हुए है।