NEWS LAHAR REPORTER
सरायकेला-खरसावां/चांडिल: स्वर्णरेखा परियोजना के तहत बने चांडिल डैम के विस्थापितों के पुनर्वास (Rehabilitation) को लेकर एक बहुत बड़ा खुलासा हुआ है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और करोड़ों रुपये के फंड आवंटन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुल 116 प्रभावित गांवों में से केवल 43 गांवों में ही विकास कार्य दिखाने और पुनर्वास कोष में लगभग 13 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता (गड़बड़ी) को लेकर विस्थापितों में भारी आक्रोश है।
🚨 मुख्य बिंदु और गंभीर अनियमितताएं (Key Allegations & Discrepancies)
* विस्थापितों का आधा-अधूरा पुनर्वास: चांडिल डैम निर्माण से कुल 116 गांव सीधे तौर पर प्रभावित या जलमग्न हुए थे। सरकारी फाइलों के मुताबिक, पुनर्वास के तहत मिलने वाली मूलभूत सुविधाएं और विकास कार्य महज 43 विस्थापित गांवों तक ही सीमित सिमट कर रह गए हैं। शेष 73 गांवों के विस्थापित आज भी नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।
* ₹13 करोड़ की कथित वित्तीय गड़बड़ी: पुनर्वास और बुनियादी ढांचा (सड़क, बिजली, पानी, स्कूल) तैयार करने के नाम पर आवंटित की गई राशि में से 13 करोड़ रुपये के फंड के दुरुपयोग और वित्तीय हेरफेर का आरोप सामने आया है। धरातल पर काम न के बराबर होने के बावजूद कागजों पर राशि की निकासी कर ली गई।
* ‘मास्टर कार्ड’ पर उठे गंभीर सवाल: विस्थापितों की पहचान और उन्हें मुआवजा व जमीन का प्लॉट आवंटित करने के लिए जारी होने वाले ‘मास्टर कार्ड’ की सत्यता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि फर्जी कागजातों और अधिकारियों की मिलीभगत से कई अयोग्य लोगों के नाम पर फर्जी मास्टर कार्ड जारी कर दिए गए, जबकि वास्तविक हकदार आज भी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
📉 विस्थापितों की दुर्दशा और प्रशासनिक चुप्पी
विस्थापित संगठनों और स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने पर हर साल उनके घर डूब जाते हैं। प्रशासन द्वारा पुनर्वास स्थलों (Rehabilitation Sites) पर न तो पीने के साफ पानी की व्यवस्था की गई है और न ही रोजगार के साधन उपलब्ध कराए गए हैं। करोड़ों रुपये का बजट कागजों पर ठिकाने लगा दिया गया। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि इस 13 करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी और फर्जी मास्टर कार्ड घोटाले की उच्च स्तरीय जांच (जैसे ACB या निगरानी विभाग द्वारा) नहीं कराई गई, तो वे चांडिल डैम के पास उग्र आंदोलन शुरू करेंगे।
