जमशेदपुर : जमशेदपुर के एमजीएम थाना क्षेत्र में हिरासत के दौरान गोकुल नगर निवासी युवक जीत महतो की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस तथ्यों को तोड़–मरोड़ कर पेश कर रही है और सच्चाई छिपाने की कोशिश की जा रही है। इसी को लेकर सोमवार को जीत महतो की बुआ, पत्नी और अन्य परिजन एसएसपी कार्यालय पहुंचे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
नम आंखों के साथ जीत की पत्नी अपनी गोद में पांच दिन के नवजात बच्चे को लेकर एसएसपी कार्यालय पहुंची। परिजनों ने मांग की कि एमजीएम अस्पताल में जीत महतो को किस दिन और किस समय भर्ती कराया गया, इसका सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किया जाए, ताकि यह साफ हो सके कि पुलिस ने युवक को कब अस्पताल पहुंचाया और कब पीआर बांड पर छोड़ा।
परिजनों का आरोप है कि 28 दिसंबर की रात करीब एक बजे पुलिस जीत महतो को घर से उठाकर ले गई, जबकि पुलिस का दावा है कि यह कार्रवाई रात तीन बजे हुई। जीत पर चोरी का मोबाइल 500 रुपये में खरीदने का आरोप था। परिजनों का कहना है कि जीत पहले से गंभीर रूप से बीमार था और उसका इलाज चल रहा था। बावजूद इसके, माता-पिता की गुहार के बाद भी पुलिस उसे थाने ले गई।
पुलिस का दावा है कि तबीयत बिगड़ने पर जीत को पीआर बांड पर छोड़कर 29 दिसंबर को एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया और इलाज के दौरान 31 दिसंबर को उसकी मौत हुई। वहीं, परिजनों का कहना है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की कोई जानकारी नहीं दी गई। जब जीत की मां एमजीएम अस्पताल पहुंचीं तो बेटे की मौत हो चुकी थी।
परिजनों ने सवाल उठाया है कि पीआर बांड जिन लोगों—सुशेन महतो, पूजा महतो और मंगल लोहरा—के सुपुर्द किया गया, वे आखिर कौन हैं। जब परिवार मौजूद था तो माता-पिता, पत्नी या बुआ को सुपुर्द क्यों नहीं किया गया। यही नहीं, परिजनों का यह भी आरोप है कि कुछ अज्ञात लोग जीत के घर पहुंचकर उसके माता-पिता को थाने बुलाने की धमकी दे रहे हैं, जबकि पुलिस इससे इनकार कर रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सांसद विद्युत वरण महतो, जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता की पत्नी सुधा गुप्ता ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की है। एसएसपी ने पीड़ित परिवार को आश्वस्त किया है कि उन्हें परेशान नहीं किया जाएगा और पूरे मामले की न्यायिक जांच की अनुशंसा की गई है।

