NEWS LAHAR REPORTER
नई दिल्ली। देश के प्रमुख मसाला ब्रांडों में शामिल एवरेस्ट के प्री-पैक्ड जीरा पाउडर को लेकर खाद्य सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने जांच में एक बैच को असुरक्षित पाए जाने के बाद संबंधित स्टॉक को बाजार से वापस मंगाने यानी रिकॉल करने का निर्देश दिया है। जांच में जीरा पाउडर के नमूने में कुछ कीटनाशकों के अवशेष निर्धारित अधिकतम सीमा से अधिक पाए गए।
गोवा से लिया गया था नमूना
मामला गोवा का है। जानकारी के अनुसार, गोवा स्थित Riverside Resorts & Holiday Homes Pvt. Ltd. से एवरेस्ट के प्री-पैक्ड जीरा पाउडर का नियामकीय नमूना लिया गया था। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की निगरानी में लिए गए इस नमूने को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया।
प्रयोगशाला जांच में जीरा पाउडर में Azoxystrobin और Thiamethoxam नामक कीटनाशकों के अवशेष निर्धारित सीमा से अधिक पाए गए। जांच रिपोर्ट के आधार पर नमूने को ‘UNSAFE’ (असुरक्षित) घोषित किया गया।
दोबारा जांच में भी सामने आई गड़बड़ी
प्रारंभिक जांच के बाद संबंधित पक्ष को रिपोर्ट के खिलाफ अपील का अधिकार दिया गया। इसके बाद नमूने को Referral Food Laboratory में दोबारा जांच के लिए भेजा गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोबारा हुई जांच में भी Azoxystrobin और Thiamethoxam के अवशेष निर्धारित अधिकतम सीमा से अधिक पाए गए। यानी दूसरी जांच में भी खाद्य सुरक्षा से जुड़ी वही चिंता सामने आई। इसके बाद संबंधित बैच को असुरक्षित मानते हुए उसे बाजार से वापस लेने की कार्रवाई की गई।
क्या पूरे एवरेस्ट ब्रांड पर लगा प्रतिबंध?
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूरे एवरेस्ट ब्रांड या उसके सभी मसालों पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। कार्रवाई जांच में असुरक्षित पाए गए विशिष्ट जीरा पाउडर बैच से संबंधित है।
इसलिए उपभोक्ताओं के लिए यह देखना जरूरी है कि उनके पास मौजूद एवरेस्ट जीरा पाउडर उसी प्रभावित बैच से संबंधित है या नहीं। किसी भी खाद्य उत्पाद को खरीदते समय बैच नंबर, निर्माण तिथि, पैकिंग विवरण और एक्सपायरी डेट की जांच करना बेहद जरूरी है।
2024 में भी सामने आया था मामला
एवरेस्ट के जीरा मसाले को लेकर इससे पहले भी सवाल उठ चुके हैं। वर्ष 2024 में राजस्थान में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच के दौरान एवरेस्ट के जीरा मसाले के नमूनों में Azoxystrobin और Thiamethoxam जैसे कीटनाशक अवशेष पाए जाने की बात सामने आई थी। उस समय भी खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर संबंधित उत्पादों पर कार्रवाई की गई थी।
आखिर ये कीटनाशक क्यों चिंता का विषय हैं?
फसलों को कीट और फंगल संक्रमण से बचाने के लिए विभिन्न कृषि रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन खाद्य पदार्थों में इनके अवशेषों की मात्रा नियामकीय सीमा के भीतर रहना जरूरी है। निर्धारित सीमा से अधिक अवशेष पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा एजेंसियां उत्पाद को असुरक्षित मान सकती हैं और उसे बाजार से हटाने की कार्रवाई कर सकती हैं।
मसालों का इस्तेमाल भारतीय घरों में रोजाना होता है। ऐसे में किसी मसाले में तय सीमा से अधिक कीटनाशक अवशेष मिलने की खबर सीधे तौर पर उपभोक्ता स्वास्थ्य और खाद्य गुणवत्ता से जुड़ जाती है।
उपभोक्ताओं को क्या करना चाहिए?
उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी जरूरी है। घर में रखा एवरेस्ट जीरा पाउडर इस्तेमाल करने से पहले उसका बैच नंबर और पैकेजिंग विवरण जरूर जांचें। यदि वह प्रभावित बैच से संबंधित है, तो उसका इस्तेमाल न करें और संबंधित खाद्य सुरक्षा अथॉरिटी या कंपनी की आधिकारिक सूचना के अनुसार आगे की कार्रवाई करें।
खास बात: FSSAI की कार्रवाई किसी पूरे ब्रांड को दोषी ठहराने के बजाय विशिष्ट जांचे गए बैच से संबंधित है। इसलिए बिना पुष्टि के एवरेस्ट के सभी उत्पादों को असुरक्षित मानना सही नहीं होगा।
खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
इस मामले ने एक बार फिर देश में पैकेज्ड मसालों की गुणवत्ता और नियमित खाद्य जांच की जरूरत को चर्चा में ला दिया है। भारत में मसालों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है और बाजार में बड़ी संख्या में पैक्ड एवं खुले मसाले उपलब्ध हैं। ऐसे में नियमित सैंपलिंग, प्रयोगशाला जांच और मानकों के उल्लंघन पर त्वरित कार्रवाई उपभोक्ताओं के भरोसे के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष: एवरेस्ट जीरा पाउडर के जिस बैच के नमूने में कीटनाशक अवशेष निर्धारित सीमा से अधिक पाए गए, उसे असुरक्षित घोषित कर स्टॉक वापस लेने का निर्देश दिया गया है। मामला खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है, हालांकि इसे पूरे एवरेस्ट ब्रांड पर प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

