NEWS LAHAR REPORTER
सरायकेला-खरसावां/चांडिल (3 नवंबर 2026): झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मंगलवार को अपनी धर्मपत्नी सह गांडेय विधायक कल्पना सोरेन के साथ चांडिल स्थित अपने मामा घर पहुंचे। धातकीडीह (कांगलाटांड़) स्थित ननिहाल में मुख्यमंत्री ने अपनी पूजनीय माता स्वर्गीय रूपी सोरेन के निधन और श्राद्धकर्म के उपरांत निभाई जाने वाली बेहद महत्वपूर्ण और पवित्र पारंपरिक रस्म अदायगी पूरी की।
💮 पारंपरिक रीति-रिवाजों से हुआ भव्य स्वागत
हिंदू और जनजातीय सामाजिक परंपराओं के अनुसार माता-पिता के अवसान के बाद अंतिम संस्कार, दशकर्म, श्राद्धकर्म और अस्थि विसर्जन की सभी रस्में पूरी होने के पश्चात ननिहाल (मामा घर) जाने की विशेष परंपरा है:
- छुतका मुक्ति की रस्म: सामाजिक मान्यताओं के अनुसार मामा घर पहुंचकर सूतक (छुतक) दूर करने की रस्म निभाई जाती है।
- पैर धोकर स्वागत: धातकीडीह पहुंचने पर परिवार के बुजुर्गों और मामा पक्ष के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मुख्यमंत्री और विधायक कल्पना सोरेन के पैर धोकर उनका आत्मीय स्वागत किया। इसके बाद उन्हें विशेष रूप से तैयार भोजन कराने की रस्म पूरी कराई गई।
🚓 प्रशासन की मुस्तैदी और ‘गार्ड ऑफ ऑनर’
मुख्यमंत्री के चांडिल आगमन को लेकर जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा के अभूतपूर्व और कड़े इंतजाम किए गए थे:
- गार्ड ऑफ ऑनर: ननिहाल पहुंचने पर सरायकेला-खरसावां जिला प्रशासन की ओर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ (Guard of Honour) दिया गया।
- अधिकारियों की मुस्तैदी: वीवीआईपी सुरक्षा व्यवस्था की कमान खुद सरायकेला-खरसावां के जिला उपायुक्त (DC) और पुलिस अधीक्षक (SP) ने संभाल रखी थी। दोनों शीर्ष अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था और रूट डायवर्जन को लेकर लगातार ऑन-फील्ड मुस्तैद और व्यस्त देखे गए।
हाल ही में सीएम हेमंत सोरेन की माता रूपी सोरेन का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था, जिसके बाद से मुख्यमंत्री अपनी सभी पारिवारिक और सामाजिक धार्मिक जिम्मेदारियों को पूरी सजगता के साथ निभा रहे हैं।

