NEWS LAHAR REPORTER
न्यू कॉलोनी में सामूहिक रूप से हुई पूजा-अर्चना, संतान की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना
गुवा संवाददाता। गुवा एवं आसपास के क्षेत्रों में शनिवार को जीवित्पुत्रिका जितिया व्रत श्रद्धा, आस्था और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जितिया व्रत को लेकर सुबह से ही महिलाओं में उत्साह देखने को मिला। विभिन्न मोहल्लों और पूजा स्थलों पर व्रती महिलाओं ने एकजुट होकर विधि-विधान के साथ भगवान जीमूतवाहन की पूजा-अर्चना की तथा अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, उज्ज्वल भविष्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
गुवा के न्यू कॉलोनी में पंडित लक्ष्मण उपाध्याय की अध्यक्षता में महिलाओं ने सामूहिक रूप से जितिया व्रत की पूजा की। इस दौरान बड़ी संख्या में व्रती महिलाएं पूजा स्थल पर पहुंचीं और श्रद्धापूर्वक भगवान जीमूतवाहन की आराधना की। पूजा के दौरान पूरे परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा। महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना कर संतान के कल्याण के लिए प्रार्थना की।
संतान की दीर्घायु के लिए रखा जाता है निर्जला व्रत
पूजा करा रहे पंडित लक्ष्मण उपाध्याय ने बताया कि जीवित्पुत्रिका व्रत सनातन परंपरा में संतान के कल्याण और दीर्घायु की कामना से जुड़ा महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, आरोग्य और सुखी जीवन की कामना को लेकर यह कठिन व्रत करती हैं।
उन्होंने बताया कि व्रती महिलाएं श्रद्धा के साथ 24 घंटे तक निर्जला उपवास रखती हैं। व्रत के दौरान महिलाएं भगवान जीमूतवाहन की पूजा कर संतान के स्वस्थ एवं सुखी जीवन के लिए प्रार्थना करती हैं।
विधि-विधान से की गई भगवान जीमूतवाहन की पूजा
पंडित उपाध्याय के अनुसार जितिया व्रत की पूजा के लिए व्रती महिलाएं स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं। इसके बाद पूजा स्थल पर भगवान जीमूतवाहन की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक परंपरा के अनुसार कुशा से बनी जीमूतवाहन की प्रतिमा पर धूप-दीप, अक्षत (चावल), पुष्प आदि अर्पित किए जाते हैं।
पूजा के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक विधि से पूजा संपन्न कर भगवान जीमूतवाहन से अपनी संतान की रक्षा, दीर्घायु और समृद्धि की प्रार्थना की। सामूहिक पूजा के कारण न्यू कॉलोनी का माहौल पूरी तरह धार्मिक और भक्तिमय नजर आया।
बिहार-झारखंड समेत कई क्षेत्रों में विशेष महत्व
पंडित लक्ष्मण उपाध्याय ने बताया कि जीवित्पुत्रिका या जितिया व्रत बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह व्रत मातृत्व की आस्था और संतान के प्रति प्रेम एवं मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है।
गुवा में भी वर्षों से महिलाएं इस परंपरा को श्रद्धापूर्वक निभाती आ रही हैं। शनिवार को आयोजित सामूहिक पूजा में महिलाओं की भागीदारी ने धार्मिक एकजुटता और सामाजिक सहभागिता का संदेश दिया। पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को व्रत की शुभकामनाएं दीं और संतान तथा परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की।

