NEWS LAHAR REPORTER
मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ की एक स्थानीय अदालत ने मर्चेंट नेवी अफसर सौरभ राजपूत की जघन्य हत्या के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. मेरठ के जिला और सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने मामले को ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ (Rarest of Rare) श्रेणी का मानते हुए दोनों मुख्य दोषियों— मृतक की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी को साहिल फांसी की सजा (मृत्युदंड) सुनाई है. [
सजा सुनाए जाने के वक्त सुरक्षा कारणों से दोनों दोषियों को जिला जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया था, जबकि कोर्ट रूम में मृतक सौरभ राजपूत की मां रेनू राजपूत और उनके भाई मौजूद रहे.
🩸 जघन्य वारदात की पूरी कहानी (Crime Background)
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- लंदन से वापसी: मर्चेंट नेवी में कार्यरत सौरभ राजपूत 24 फरवरी 2025 को लंदन से नौकरी छोड़कर मेरठ स्थित अपने घर (इंद्रानगर) लौटे थे.
- साजिश और हत्या: मुस्कान और साहिल के बीच अवैध संबंध थे. दोनों ने मिलकर सौरभ को रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रची. 3 मार्च 2025 को मुस्कान ने घर पर सौरभ के खाने में नशीली दवा मिला दी. सौरभ के बेहोश होते ही मुस्कान और साहिल ने मिलकर चाकू से गोदकर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी.
- लाश के टुकड़े और नीला ड्रम: सबूत मिटाने के लिए उन्होंने बाथरूम में शव के तीन टुकड़े किए. इसके बाद बाजार से एक बड़ा नीला प्लास्टिक ड्रम, सीमेंट और रेत खरीदा गया. शव के टुकड़ों को ड्रम में डालकर उसे सीमेंट और कंक्रीट के मलबे से पूरी तरह भर दिया गया ताकि बदबू न फैले. वारदात को अंजाम देकर दोनों आरोपी शिमला (हिमाचल प्रदेश) फरार हो गए.
⚖️ 13 महीने का ट्रायल, 126 तारीखें और न्याय
इस सनसनीखेज हत्याकांड के खुलासे के बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया था. अभियोजन पक्ष ने अदालत में बेहद मजबूत परिस्थितिजन्य साक्ष्य (Circumstantial Evidence) पेश किए:
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- गवाहों की फेहरिस्त: करीब 13 महीने तक चले इस ट्रायल के दौरान कुल 126 तारीखें पड़ीं और 22 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए.
- दुकानदारों की गवाही: अदालत में उन दुकानदारों की गवाही भी बेहद अहम रही, जिनसे आरोपियों ने हत्या में इस्तेमाल चाकू, लाश छिपाने के लिए नीला ड्रम, दवाइयां, सीमेंट और रेत खरीदी थी.
- 30 सितंबर को हुए थे दोषी करार: अदालत ने 30 सितंबर 2026 को ही दोनों को हत्या (IPC 302) और साक्ष्य मिटाने (IPC 201) का दोषी ठहरा दिया था और आज (14 अक्टूबर 2026) सजा मुकर्रर कर दी.
🏛️ कोर्ट की टिप्पणी: समाज में डर पैदा करने वाला कृत्य
फैसला सुनाते हुए माननीय न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि इस प्रकार के क्रूरतापूर्ण अपराध न सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या करते हैं, बल्कि पूरे समाज में भय का माहौल पैदा करते हैं. कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलीलों से सहमत होते हुए दोनों को फांसी की सजा सुनाई. फैसला सुनते ही कोर्ट रूम में मौजूद सौरभ की बुजुर्ग मां और भाई की आंखें नम हो गईं, जिन्होंने कहा कि आखिरकार उनके बेटे को न्याय मिल गया है.

