NEWS LAHAR REPORTER
सरायकेला। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने चांडिल बहुउद्देशीय डैम की तस्वीर बदल दी है। डैम का जलस्तर 181 मीटर के पार पहुंचते ही प्रबंधन ने 13 रेडियल गेट खोल दिए हैं। डैम से करीब 1,594 क्यूमेक्स पानी प्रति सेकेंड की रफ्तार से छोड़ा जा रहा है। भारी जलनिकासी के बाद सुबर्णरेखा नदी के किनारे बसे इलाकों में बाढ़ का खतरा तेजी से बढ़ गया है।
चांडिल डैम से पानी छोड़े जाने का सीधा असर सुबर्णरेखा नदी के जलस्तर पर पड़ रहा है। नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। जमशेदपुर के नदी तटीय क्षेत्रों से लेकर पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों तक खतरे की घंटी बजने लगी है।
13 गेट खोलकर भारी जलनिकासी
डैम प्रबंधन के अनुसार 13 रेडियल गेट अलग-अलग ऊंचाई पर खोले गए हैं। रेडियल गेटों से 1,480.285 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा नदी स्लुइस से 4.582 क्यूमेक्स और आपातकालीन स्लुइस से 78.168 क्यूमेक्स पानी की निकासी हो रही है।

इस तरह नदी में कुल प्रवाह 1,563.035 क्यूमेक्स दर्ज किया गया है, जबकि नहर के रास्ते 31.389 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। डैम से कुल जल प्रवाह 1,594.424 क्यूमेक्स है। वर्तमान जल भंडारण करीब 549.01 MCM बताया गया है।
सुबर्णरेखा किनारे गांवों में बढ़ी चिंता
डैम से इतनी बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद सुबर्णरेखा नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी की आशंका है। नदी किनारे बसे गांवों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। तटीय इलाकों में माइकिंग कर लोगों को नदी से दूर रहने और जरूरत पड़ने पर ऊंचे एवं सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है।
मछुआरों को नदी में उतरने से रोकने के साथ मवेशियों को भी नदी किनारे नहीं ले जाने की सख्त हिदायत दी गई है।
जमशेदपुर के निचले इलाकों पर भी नजर
चांडिल से छोड़ा गया पानी सुबर्णरेखा नदी के रास्ते आगे बढ़ रहा है। ऐसे में जमशेदपुर के कदमा, बागबेड़ा, आदित्यपुर समेत नदी किनारे और निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। आगे पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में भी इसका असर पड़ने की आशंका है।
बारिश जारी रही तो बढ़ सकती है गेटों की संख्या
डैम प्रबंधन लगातार जलस्तर और बारिश की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों के अनुसार मौसम और डैम में पानी की आवक को देखते हुए आने वाले समय में गेटों की संख्या और उनकी ऊंचाई में बदलाव किया जा सकता है।
फिलहाल प्रशासन और डैम प्रबंधन पूरी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। लोगों से अपील की गई है कि अफवाहों पर ध्यान न दें, नदी किनारे जाने से बचें और प्रशासन की चेतावनियों का पालन करें।
चांडिल डैम से भारी जलनिकासी के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती सुबर्णरेखा के बढ़ते जलस्तर को नियंत्रित रखना है। बारिश का सिलसिला जारी रहा तो निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा और गंभीर हो सकता है।
