NEWS LAHAR REPORTER
जमशेदपुर : एमजीएम अस्पताल में मरीजों के इलाज में वरिष्ठ डॉक्टरों की कथित अनदेखी का मामला एक बार फिर सामने आया है। शुक्रवार को इलाज के दौरान 42 वर्षीय मरीज सुखराम टुडू की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि गुरुवार रात अस्पताल में भर्ती कराने के बाद से शुक्रवार दोपहर तक मरीज को किसी वरिष्ठ डॉक्टर ने नहीं देखा। इलाज की जिम्मेदारी मुख्य रूप से जूनियर डॉक्टरों के भरोसे रही।
एदेलबेड़ा निवासी सुखराम टुडू आजसू पार्टी के पूर्वी सिंहभूम जिला अध्यक्ष मंगल टुडू के बड़े भाई थे। परिजनों के अनुसार, उन्हें गुरुवार रात करीब आठ बजे तबीयत खराब होने के बाद एमजीएम अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया था। बताया गया कि तीन-चार वर्ष पहले उन्हें ब्रेन हैमरेज हुआ था और पिछले दो दिनों से बुखार समेत अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानी थी।
मंगल टुडू के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे जब उनके भाई की तबीयत बिगड़ने लगी तो उन्होंने डॉक्टरों से वरिष्ठ चिकित्सक को बुलाने का आग्रह किया। आरोप है कि इस दौरान एक डॉक्टर ने कहा कि मरीज को अभी भर्ती ही नहीं किया गया है। इस पर मंगल टुडू ने सवाल उठाया कि यदि गुरुवार रात से शुक्रवार तक मरीज भर्ती नहीं हुआ तो इसे किस तरह समझा जाए।
इसके बाद शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे मरीज की हालत और बिगड़ने पर मंगल टुडू ने स्वास्थ्य मंत्री और उपायुक्त समेत अन्य अधिकारियों को ट्वीट कर शिकायत की। उन्होंने पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो से भी मामले की शिकायत की। मंगल टुडू के मुताबिक, सुदेश महतो ने एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बलराम झा को फोन कर मरीज को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इसके बाद अस्पताल प्रशासन सक्रिय हुआ और कई वरिष्ठ डॉक्टरों ने मरीज को देखा।
परिजनों का दावा है कि करीब 16 घंटे बाद वरिष्ठ चिकित्सकों के पहुंचने तक मरीज की हालत काफी गंभीर हो चुकी थी। शुक्रवार शाम करीब 5:30 बजे इमरजेंसी में इलाज के दौरान सुखराम टुडू की मौत हो गई।
मंगल टुडू ने आरोप लगाया कि एमजीएम अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था में आम मरीजों को वरिष्ठ चिकित्सकों की पर्याप्त निगरानी नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ डॉक्टर तब तक इमरजेंसी में नहीं पहुंचते, जब तक किसी प्रभावशाली व्यक्ति का फोन नहीं आता। हालांकि, अस्पताल प्रशासन की ओर से इस मामले में तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है

