NEWS LAHAR REPORTER
सरायकेला। कांद्रा-चांडिल मुख्य मार्ग से जुड़ी गिद्दीबेड़ा से चांडिल गोलचक्कर तक 6.33 किलोमीटर सड़क की बदहाली को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। करीब 11 महीने पहले शिलान्यास होने के बावजूद सड़क निर्माण अब तक पूरा नहीं हो सका है। लगातार बारिश और भारी वाहनों की आवाजाही ने सड़क की हालत और बिगाड़ दी है। जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे, कीचड़ और उड़ती धूल के कारण ग्रामीणों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मामले को लेकर चांडिल प्रखंड कार्यालय में एसडीएम नितिन शिवम गुप्ता की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में बीडीओ तालेश्वर रविदास, जनप्रतिनिधि, ठेकेदार, जेई समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने सड़क की मौजूदा स्थिति पर चर्चा करते हुए तत्काल राहत के उपायों पर विचार किया।
टेंडर फाइनल होने तक सड़क को किया जाएगा मोटरेबल
बैठक में बताया गया कि सड़क का रिटेंडर किया जाना है और इसकी संचिका विभागीय स्तर पर भेजी जा चुकी है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने में समय लगने की संभावना को देखते हुए फिलहाल संबंधित एजेंसी को सड़क को मोटरेबल बनाने का निर्देश देने का निर्णय लिया गया, ताकि आवागमन में लोगों को कुछ राहत मिल सके और दुर्घटना की आशंका कम हो।
टेंडर फाइनल होने के बाद नियमानुसार सड़क का स्थायी निर्माण शुरू कराने की बात कही गई।
ग्रामीणों की दो टूक—पहले बैरिकेडिंग, फिर मरम्मत
बैठक के दौरान स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने सड़क पर भारी वाहनों के प्रवेश पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। उनका कहना है कि जर्जर सड़क पर भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से स्थिति और खराब हो रही है।
ग्रामीणों ने सड़क पर बैरिकेडिंग कर भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्ग से भेजने का सुझाव भी दिया। एसडीएम ने इस मामले में जिला उपायुक्त से चर्चा कर जल्द समाधान निकालने का आश्वासन दिया।
‘11 महीने से सिर्फ इंतजार, सड़क पर सफर बना मुसीबत’
ग्रामीणों का कहना है कि 2 दिसंबर 2025 को सड़क का शिलान्यास किया गया था, लेकिन इतने समय बाद भी निर्माण कार्य जमीन पर गति नहीं पकड़ सका। बारिश के बाद सड़क पर बने गड्ढों में पानी भर जाता है, जबकि मौसम साफ होते ही वाहनों के गुजरने से धूल का गुबार उठता है।
गिद्दीबेड़ा, कांद्रा और आसपास के गांवों के लोगों का कहना है कि रोजाना इस सड़क से गुजरना मजबूरी बन गया है। बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों को धूल और गड्ढों के कारण सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है।
आंदोलनकारी ने लगाया राजनीतिक-प्रशासनिक लापरवाही का आरोप
सड़क निर्माण को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे कृष्ण चंद्र महतो ने आरोप लगाया कि सड़क की बदहाली के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर की लापरवाही जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि बार-बार बैठक और आश्वासन के बजाय जमीन पर काम शुरू होना चाहिए।
वहीं आशुतोष महतो, सलमा मार्डी समेत स्थानीय लोगों ने भी सड़क निर्माण प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे फिर आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
क्या है पूरा मामला?
सड़क: गिद्दीबेड़ा से चांडिल गोलचक्कर
लंबाई: 6.33 किमी
चिह्नित हिस्सा: किमी 6.00 से 12.33
शिलान्यास: 2 दिसंबर 2025
विभाग: पथ निर्माण विभाग, सरायकेला-खरसावां प्रमंडल
मौजूदा स्थिति: सड़क जर्जर, जगह-जगह गड्ढे
तत्काल फैसला: टेंडर फाइनल होने तक सड़क को मोटरेबल बनाने का प्रयास
ग्रामीणों की मांग: बैरिकेडिंग कर भारी वाहनों पर रोक और जल्द स्थायी निर्माण
फिलहाल प्रशासन ने सड़क को अस्थायी रूप से चलने लायक बनाने और रिटेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्थायी निर्माण शुरू कराने की बात कही है। अब ग्रामीणों की नजर आश्वासन पर नहीं, बल्कि सड़क पर शुरू होने वाले वास्तविक काम पर टिकी है।

