NEWS LAHAR REPORTER
जमशेदपुर: छात्र एकता की केंद्रीय कमिटी ने असम में वर्षों से रह रहे संथाल, हो, मुंडा, उरांव सहित अन्य आदिवासी समुदायों को संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने की मांग की है। संगठन की ओर से सोमवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में आदिवासी समाज से जुड़े विभिन्न गंभीर मुद्दों पर चर्चा की गई।
संगठन ने कहा कि असम में लंबे समय से रह रहे संथाल, हो, मुंडा और उरांव आदिवासियों को वर्तमान में ‘टी ट्राइब्स’ के नाम से संबोधित किया जाता है। ऐसे समुदायों को संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत सूचीबद्ध करने की मांग को लेकर संघर्ष जारी रखने की बात कही गई।
संवाददाता सम्मेलन में CNT Act, SPT Act और Wilkinson’s Rule के अनुपालन को लेकर भी चर्चा की गई। इसके अलावा पाँचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों में आदिवासी जमीन के संरक्षण और भूमि अधिकार से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।
आदिवासी छात्र एकता ने Land Bank Policy को रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि आदिवासी भूमि की सुरक्षा के लिए व्यापक जनआंदोलन की आवश्यकता है। साथ ही संविधान की पाँचवीं अनुसूची और अनुच्छेद 244(1) में दिए गए प्रावधानों को अनुसूचित क्षेत्रों में सख्ती से लागू करने की मांग की गई।
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी संस्कृति और जमीन से जुड़ी हुई है। उन्होंने आदिवासी समुदाय के अधिकारों और अस्तित्व की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।
बताया गया कि आगामी जनसभा में झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से जुड़े विद्वान, छात्र, सामाजिक नेता और बुद्धिजीवी शामिल होंगे। जनसभा में आदिवासी समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों के साथ SIR और परिसीमन (Delimitation) जैसे गंभीर विषयों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
संवाददाता सम्मेलन में जोसाई मार्डी, इन्दर हेम्ब्रम, हेमेन्द्र हाँसदा, सिन्धुराम किस्कू, हरिमोहन टुडू, नन्दलाल सरदार, राज बॉकिरा, स्वपन सरदार, गुरुचरण सोरेन, चाँदराय मार्डी, प्रभाकर हाँसदा, देवानन्द सिंह, फागु हाँसदा, दुर्गा चरण हेम्ब्रम, नवीन मुर्मू, सुनील माहली, किशोर मार्डी, बुद्धिनाथ मुर्मू, गाँधी माहली, दुलाल हाँसदा, सुरेश मुर्मू, मिथुन मुर्मू, कल्याण हाँसदा, सकला मार्डी, हरेन सिंह भूमिज, वीर सिंह टोपनो और सन्नी पूर्ति समेत कई लोग मौजूद रहे।
आदिवासी छात्र एकता के मुख्य संरक्षक जोसाई मार्डी, संयोजक इन्दर हेम्ब्रम और अध्यक्ष हेमेन्द्र हाँसदा ने कहा कि आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों, जमीन और संस्कृति की रक्षा के लिए संगठन लगातार आवाज उठाता रहेगा।

