NEWS LAHAR REPORTER
दोनों घुटने 100 डिग्री से अधिक मुड़कर जकड़ गए थे, चलना तो दूर व्हीलचेयर पर बैठना भी हुआ था मुश्किल
जमशेदपुर, 24 सितंबर 2026। गंभीर गठिया (आर्थराइटिस) के कारण एक साल से अधिक समय तक असहनीय दर्द और चलने-फिरने की समस्या से जूझ रहीं गोविंदपुर की 56 वर्षीय महिला को जमशेदपुर के तामोलिया स्थित ब्रह्मानंद नारायणा अस्पताल में सफल उपचार के बाद दोबारा अपने पैरों पर खड़े होने का मौका मिला है।
महिला के दोनों घुटने बीमारी के कारण धीरे-धीरे 100 डिग्री से अधिक मुड़कर उसी स्थिति में जकड़ गए थे। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि उनके लिए खड़ा होना और चलना तो दूर, व्हीलचेयर पर आराम से बैठना भी मुश्किल हो गया था। लंबे समय तक वह घर के एक कमरे तक सीमित रहीं और रोजमर्रा के कामों के लिए परिवार के सदस्यों पर उनकी निर्भरता बढ़ती चली गई।
परिजन जब उन्हें अस्पताल के वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. वरुण चंद्रा के पास लेकर पहुंचे, तब तक घुटनों की स्थिति काफी जटिल हो चुकी थी। मरीज की हड्डियां भी नाजुक थीं, जिससे सर्जरी के दौरान आसपास की रक्त आपूर्ति को नुकसान पहुंचने का जोखिम बना हुआ था।
जटिल थी दोनों घुटनों की सर्जरी
डॉक्टरों के अनुसार, घुटनों के अत्यधिक मुड़ जाने के कारण यह सामान्य नी रिप्लेसमेंट की तुलना में काफी चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया थी। सर्जरी के दौरान जोड़ों के बीच की दूरी का बेहद सटीक आकलन करना जरूरी था, ताकि इम्प्लांट सही तरीके से लगाए जा सकें और मरीज के घुटने में आवश्यक गति वापस लाई जा सके।
इसके साथ ही नाजुक हड्डियों और आसपास की संरचनाओं को सुरक्षित रखना भी टीम के लिए महत्वपूर्ण चुनौती थी। कई चिकित्सकीय जोखिमों के बावजूद डॉक्टरों की टीम ने बाइलेटरल नी रिप्लेसमेंट यानी दोनों घुटनों का प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक पूरा किया।
सर्जरी के कुछ ही दिनों बाद मरीज ने बिना किसी सहारे के खुद खड़े होने की क्षमता हासिल कर ली। हालांकि अभी उन्हें चलने के दौरान कुछ सहारे की आवश्यकता पड़ रही है और वह धीरे-धीरे अपनी मांसपेशियों की ताकत एवं आत्मविश्वास वापस हासिल कर रही हैं।
टीमवर्क से मिली सफलता
इस जटिल सर्जरी में डॉ. वरुण चंद्रा के साथ डॉ. शशि श्रीवास्तव का सहयोग रहा। वहीं डॉ. उमेश प्रसाद के नेतृत्व में एनेस्थीसिया टीम ने जटिल एनेस्थीसिया एवं दर्द प्रबंधन को संभाला।
डॉ. वरुण चंद्रा ने कहा कि यह बेहद जोखिम वाली सर्जरी थी, क्योंकि मरीज की स्थिति काफी जटिल थी और सर्जरी के दौरान कई प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, सर्जरी आवश्यक हो चुकी थी और इसके अलावा कोई व्यावहारिक विकल्प नहीं बचा था।
उन्होंने कहा कि पूरी टीम के सहयोग से बिना मरीज को अतिरिक्त नुकसान पहुंचाए सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। उन्होंने कहा कि मरीज का अब दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होना और चलना शुरू करना उनके लिए बेहद संतोषजनक है, क्योंकि कुछ समय पहले तक यह लगभग असंभव दिखाई दे रहा था।
अस्पताल प्रबंधन ने बताया चिकित्सा टीम की उपलब्धि
ब्रह्मानंद नारायणा अस्पताल, तामोलिया, जमशेदपुर के फैसिलिटी डायरेक्टर अक्किरेड्डी धर्म राव ने कहा कि ऐसे जटिल मामले यह दिखाते हैं कि अस्पताल में उपलब्ध उन्नत चिकित्सा सुविधाएं गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने कहा कि मरीज की स्थिति में आया बदलाव चिकित्सा टीम की विशेषज्ञता, बेहतर समन्वय और आधुनिक उपचार सुविधाओं के संयुक्त प्रयास का परिणाम है।
फिलहाल मरीज धीरे-धीरे चलने की क्षमता और आत्मविश्वास हासिल कर रही हैं। लंबे समय तक बीमारी की वजह से सीमित जीवन जीने के बाद अब उनके लिए सामान्य जीवन की ओर लौटने की नई उम्मीद जगी है।

