जमशेदपुर: जमशेदपुर से सटे ग्रामीण क्षेत्र बारूडीह गांव की महिलाएं आज आत्मनिर्भर भारत की सशक्त तस्वीर पेश कर रही हैं। जो महिलाएं कभी घर के कामकाज और खेतों की मजदूरी तक सीमित थीं, वही महिलाएं अब अपने हुनर के दम पर मुंबई और कोलकाता के फैशन शो तक पहचान बना चुकी हैं।
बारूडीह गांव की अधिकतर महिलाएं पहले घरेलू जिम्मेदारियों या कृषि कार्यों में लगी रहती थीं। लेकिन आश्रा नामक संस्था ने इनके जीवन की दिशा बदलने की पहल की। संस्था ने महिलाओं को काशी घास (काशी फूल) से विभिन्न प्रकार के हस्तनिर्मित उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया। शुरुआत में इस काम को सीखना महिलाओं के लिए चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन निरंतर अभ्यास और मार्गदर्शन के बाद आज वे पूरी तरह दक्ष हो चुकी हैं।
अब ये महिलाएं काशी घास से टोपी, पर्स, हैंडबैग, टोकरी और फैशन शो में उपयोग होने वाले आकर्षक डिजाइनर उत्पाद तैयार कर रही हैं। इनके बनाए सामानों की मांग सिर्फ स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं है, बल्कि कोलकाता और मुंबई के नामी फैशन डिजाइनर खुद गांव आकर इन महिलाओं से संपर्क करते हैं। डिजाइनर अपने डिजाइन देकर जाते हैं और महिलाएं उन्हीं के अनुरूप उत्पाद तैयार करती हैं, जिन्हें बाद में बड़े फैशन शो में प्रदर्शित किया जाता है।
इस काम से ग्रामीण महिलाओं को अच्छी आमदनी हो रही है और कई महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बन चुकी हैं।
महिला कारीगर शकुंतला महतो बताती हैं कि डिजाइनर लोग गांव आते हैं, हमें डिजाइन समझाते हैं और हम उसी के अनुसार सामान बनाते हैं, जिसे बड़े फैशन शो में इस्तेमाल किया जाता है।
संस्था द्वारा दो स्वयं सहायता समूह गठित किए गए हैं, जिनमें प्रत्येक समूह में 10 महिलाएं शामिल हैं। पहले इन्हें पूरी तरह प्रशिक्षण दिया गया और अब इनकी कुशलता का स्तर इतना ऊंचा है कि बड़े शहरों के डिजाइनर भी इन पर भरोसा जता रहे हैं।
संस्था के संयोजक सत्यजीत कुमार बताते हैं कि सही प्रशिक्षण और अवसर मिलने से ग्रामीण महिलाएं भी बड़े मंच तक पहुंच सकती हैं।
बहरहाल, बारूडीह गांव की ये महिलाएं यह साबित कर रही हैं कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से गांव की महिलाएं भी अपने हुनर से देश और दुनिया में पहचान बना सकती हैं।
