NEWS LAHAR REPORTER
Jamshedpur : अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन की राष्ट्रीय प्रबंध कार्यसमिति और राष्ट्रीय कार्यसमिति की महत्वपूर्ण बैठक 25 से 27 जुलाई तक जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित होटल रमाडा में आयोजित होगी। इस आयोजन की मेजबानी पूर्वी सिंहभूम जिला अग्रवाल सम्मेलन करेगा। देशभर के विभिन्न राज्यों से 160 से अधिक राष्ट्रीय एवं प्रांतीय पदाधिकारी, उद्योगपति और समाजसेवी इस ऐतिहासिक बैठक में शामिल होंगे।
सम्मेलन के आयोजकों के अनुसार उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पंजाब, उत्तर प्रदेश और झारखंड समेत कई राज्यों के प्रतिनिधि जमशेदपुर पहुंचेंगे। बैठक में संगठन के विस्तार, सेवा कार्यों और आगामी राष्ट्रीय कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
यह आयोजन इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के 51 वर्षों के इतिहास में पहली बार झारखंड से राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन हुआ है। रांची निवासी बसंत कुमार मित्तल वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वहीं गोविंदपुर निवासी नंदलाल अग्रवाल युवा सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राउरकेला की वंदना टिबड़ेवाल महिला सम्मेलन की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
राष्ट्रीय बैठक में देश के प्रतिष्ठित उद्योगपति और संगठन के भामाशाह ट्रस्टी भी शामिल होंगे। इसके अलावा राष्ट्रीय महामंत्री, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, उपाध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष, युवा एवं महिला सम्मेलन के पदाधिकारी संगठन की भावी रणनीति पर मंथन करेंगे।
25 जुलाई को भगवान श्री जगन्नाथ महाप्रसाद, राष्ट्रीय प्रबंध कार्यसमिति की बैठक, नव-निर्वाचित पदाधिकारियों का शपथ ग्रहण समारोह, ग़ज़ल संध्या और स्नेह मिलन का आयोजन होगा। 26 जुलाई को टाटानगर गौशाला स्थित श्री अग्रसेन ज्ञान मंदिर में माल्यार्पण और तुलादान कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। वहीं 27 जुलाई को राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में संगठन की भावी कार्ययोजना, सेवा परियोजनाओं, युवा और महिला इकाइयों की भूमिका तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर निर्णय लिया जाएगा।
आयोजन की सफलता के लिए स्वागत, आवास, परिवहन, मीडिया, पंजीकरण, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य व्यवस्थाओं के लिए अलग-अलग समितियों का गठन किया गया है। प्रदेश अध्यक्ष संदीप मुरारका और प्रदेश महामंत्री अभिषेक अग्रवाल ‘गोल्डी’ पूरे आयोजन के मुख्य समन्वयक की भूमिका निभाएंगे।
यह राष्ट्रीय आयोजन अग्र समाज के संगठनात्मक इतिहास का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है और इससे संगठन को नई दिशा देने वाली कई अहम घोषणाएं होने की संभावना जताई जा रही है।

