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किरीबुरू अस्पताल की बदहाली, जर्जर सड़कें और ठेका मजदूरों के मोबाइल प्रतिबंध का मुद्दा उठा; रामा पांडेय ने दी व्यापक आंदोलन की चेतावनी
गुवा संवाददाता। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के निदेशक (खान) विकास मनवाटी की अध्यक्षता में मेघाहातुबुरू जनरल ऑफिस के कॉन्फ्रेंस हॉल में विभिन्न श्रमिक यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में मजदूरों की लंबे समय से लंबित समस्याओं, चिकित्सा सुविधाओं, आवास, इंसेंटिव भुगतान और खदानों में ठेका श्रमिकों के मोबाइल फोन ले जाने पर प्रतिबंध सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि, प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने से श्रमिक नेताओं में नाराजगी देखी गई। झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडेय ने बैठक को असफल बताते हुए चेतावनी दी कि समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
किरीबुरू सेल अस्पताल की बदहाल व्यवस्था पर उठे सवाल
बैठक में किरीबुरू सेल अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। श्रमिक प्रतिनिधियों ने अस्पताल में सर्जन, हड्डी रोग विशेषज्ञ और स्त्री रोग विशेषज्ञ की कमी पर चिंता जताई। इसके साथ ही वर्षों से बंद पड़े ब्लड बैंक और रेफरल सुविधा से जुड़ी परेशानियों को भी सामने रखा गया।
इस पर प्रबंधन की ओर से कहा गया कि डॉक्टर यहां आने के इच्छुक नहीं हैं। प्रबंधन के इस जवाब से श्रमिक प्रतिनिधि संतुष्ट नहीं हुए। उनका कहना था कि कर्मचारियों और उनके परिवारों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और अन्य चिकित्सा समस्याओं के कारण मरीजों को होने वाली परेशानियों का स्थायी समाधान जरूरी है।
15 साल से लंबित इंसेंटिव और रिवॉर्ड भुगतान पर फैसला नहीं
बैठक में करीब 15 वर्षों से लंबित इंसेंटिव और रिवॉर्ड भुगतान का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया गया। श्रमिक प्रतिनिधियों ने सवाल किया कि लंबे समय से लंबित भुगतान को लेकर प्रबंधन अब तक स्पष्ट निर्णय क्यों नहीं ले पाया है।
हालांकि, इस मुद्दे पर प्रबंधन की ओर से न तो भुगतान की कोई निश्चित समय सीमा बताई गई और न ही बकाया राशि के भुगतान को लेकर ठोस घोषणा की गई। इससे श्रमिक नेताओं में असंतोष और बढ़ गया।
जर्जर सड़कों और पुराने आवासों की मरम्मत की मांग
मेघाहातुबुरू और किरीबुरू टाउनशिप की जर्जर सड़कों तथा सेल कर्मचारियों के पुराने आवासों की मरम्मत का मामला भी बैठक में उठा। श्रमिक प्रतिनिधियों ने कहा कि खराब सड़कों और जर्जर आवासों के कारण कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
निदेशक (खान) ने सड़क निर्माण और आवास संबंधी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। हालांकि, खाली पड़े सेल आवासों को किराये पर उपलब्ध कराने की मांग को प्रबंधन ने स्वीकार नहीं किया।
कैशलेस इलाज और वातानुकूलित शव वाहन का प्रस्ताव
बैठक में सेल कर्मचारियों को बाहर इलाज कराने के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तथा वातानुकूलित शव वाहन की व्यवस्था करने का प्रस्ताव भी रखा गया। प्रबंधन ने इन प्रस्तावों पर विचार करने की बात कही, लेकिन तत्काल कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया।
ठेका मजदूरों के मोबाइल प्रतिबंध पर प्रबंधन सख्त
खदानों में ठेका श्रमिकों के मोबाइल फोन ले जाने पर लगाए गए प्रतिबंध का मुद्दा भी बैठक में चर्चा का विषय बना। श्रमिक प्रतिनिधियों ने इस प्रतिबंध को लेकर अपनी बात रखी, लेकिन प्रबंधन ने सुरक्षा और शून्य दुर्घटना के लक्ष्य का हवाला देते हुए प्रतिबंध जारी रखने का निर्णय लिया।
रामा पांडेय बोले—समाधान नहीं हुआ तो होगा व्यापक आंदोलन
झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडेय ने बैठक पर असंतोष जताते हुए कहा कि मजदूरों के हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन प्रबंधन की ओर से उनके समाधान के लिए ठोस पहल नहीं दिखाई दे रही है। अस्पताल की बदहाल व्यवस्था, वर्षों से लंबित इंसेंटिव और रिवॉर्ड भुगतान तथा अन्य बुनियादी समस्याओं पर स्पष्ट निर्णय का अभाव निराशाजनक है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मजदूरों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो संयुक्त श्रमिक यूनियनों के माध्यम से व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
कुल मिलाकर, बैठक में समस्याओं पर चर्चा तो हुई, लेकिन कई प्रमुख मांगों पर समयबद्ध निर्णय नहीं होने से मजदूरों की उम्मीदों को झटका लगा है। अब देखना होगा कि सेल प्रबंधन इन लंबित मुद्दों के समाधान के लिए कब ठोस कदम उठाता है।

