NEWS LAHAR REPORTER
खाता संख्या 218, प्लॉट संख्या 1003 की 1 एकड़ जमीन को लेकर ग्रामसभा में विरोध; धारा 46 का हवाला देकर उच्चस्तरीय जांच और सरकारी उपयोग के लिए जमीन सुरक्षित रखने की मांग
सरायकेला। सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत चमारू पंचायत के रंगामाटिया गांव में सरकारी जमीन की बंदोबस्ती को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले को लेकर रविवार को गांव में ग्रामीणों की महत्वपूर्ण ग्रामसभा आयोजित की गई। ग्रामसभा में ग्रामीणों ने करीब 25 वर्ष पूर्व की गई जमीन की बंदोबस्ती पर सवाल उठाते हुए इसे नियमों के विरुद्ध बताया और जिला प्रशासन से तत्काल रद्द करने की मांग की।
ग्रामीणों के अनुसार, रंगामाटिया गांव के खाता संख्या 218, प्लॉट संख्या 1003 की कुल 4 एकड़ 40 डिसमिल सरकारी जमीन में से एक एकड़ जमीन करीब 25 वर्ष पूर्व सुसेन महतो के नाम पर बंदोबस्त की गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि बंदोबस्ती की निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया गया है। इसी आधार पर उन्होंने संबंधित कानून की धारा 46 का हवाला देते हुए बंदोबस्ती की वैधता की जांच कराने की मांग की।
धारा 46 का हवाला देकर बंदोबस्ती रद्द करने की मांग
ग्रामसभा में ग्रामीणों ने कहा कि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) की धारा 46 एवं बंदोबस्ती से संबंधित शर्तों के आलोक में मामले की जांच होनी चाहिए। ग्रामीणों का दावा है कि आवंटित जमीन पर निर्धारित अवधि में खेती या दखल-कब्जा नहीं किए जाने की स्थिति में बंदोबस्ती रद्द करने का प्रावधान लागू हो सकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि बंदोबस्ती के समय तय की गई शर्तों, जमीन के वास्तविक उपयोग और कानूनी प्रावधानों की जांच कर उचित निर्णय लिया जाए।
उप स्वास्थ्य केंद्र निर्माण की जमीन को लेकर पहले भी हुआ था विवाद
रंगामाटिया गांव में सरकारी जमीन को लेकर विवाद पहले भी सामने आ चुका है। ग्रामीणों के अनुसार, उक्त जमीन के एक हिस्से पर मकान का निर्माण किया जा रहा था, जबकि उसी स्थान पर गांव के लिए उप स्वास्थ्य केंद्र बनाने का प्रस्ताव था। इसको लेकर ग्रामीणों ने विरोध किया था। विरोध के दौरान निर्माणाधीन मकान को ग्रामीणों द्वारा तोड़े जाने की घटना भी सामने आई थी। इसके बाद से ही जमीन का मामला लगातार विवाद का विषय बना हुआ है।
संपन्न व्यक्ति को सरकारी जमीन देने पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
ग्रामसभा में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सुसेन महतो आर्थिक रूप से संपन्न हैं और उनके पास पहले से कई एकड़ निजी जमीन है। ग्रामीणों का यह भी दावा है कि आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में उनकी निजी कंपनी संचालित है। ऐसे में सरकारी जमीन की बंदोबस्ती के औचित्य और पात्रता की जांच होनी चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी जमीन का उपयोग जनहित में होना चाहिए तथा इसका लाभ वास्तविक जरूरतमंदों और भूमिहीनों को मिलना चाहिए।
उच्चस्तरीय जांच और सरकारी उपयोग के लिए जमीन सुरक्षित रखने की मांग
ग्रामसभा में ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। उनकी प्रमुख मांग है कि यदि जांच में बंदोबस्ती नियमों के विरुद्ध पाई जाती है तो उसे नियमानुसार रद्द किया जाए और पूरी जमीन को सरकारी उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि भविष्य में इस जमीन पर उप स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल अथवा अन्य जनकल्याणकारी सरकारी संस्थान का निर्माण कराया जा सके, इसके लिए जमीन को विवादमुक्त करना आवश्यक है।
