NEWS LAHAR REPORTER
रांची। झारखंड अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ आदिवासी कला और पारंपरिक हस्तशिल्प के लिए भी देश-दुनिया में अलग पहचान रखता है। रांची के प्रसिद्ध हुंडरू फॉल्स के आसपास भी स्थानीय कारीगर अपनी मेहनत और हुनर से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। बिना आधुनिक मशीनों और महंगे उपकरणों के साधारण औजारों की मदद से लकड़ी को आकर्षक कलाकृतियों में बदलना इनके हुनर की खास पहचान बनती जा रही है।
हुंडरू फॉल्स रांची के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां स्वर्णरेखा नदी करीब 320 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरती है, जिससे यह क्षेत्र प्राकृतिक सुंदरता के साथ पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा केंद्र बना हुआ है।
पुरानी कुल्हाड़ी बनी कला का औजार
हुंडरू के आसपास स्थानीय कारीगरों द्वारा लकड़ी पर की जाने वाली नक्काशी की तस्वीरें और वीडियो अक्सर लोगों को आकर्षित करते हैं। खास बात यह है कि इस तरह की कला में आधुनिक मशीनों के बजाय पारंपरिक औजारों का इस्तेमाल किया जाता है। एक साधारण पुरानी कुल्हाड़ी और कारीगर के हाथों का हुनर मिलकर लकड़ी के सामान्य टुकड़े को आकर्षक कलाकृति में बदल देता है।
लकड़ी को काटने, आकार देने और उसकी सतह पर बारीक काम करने की प्रक्रिया पूरी तरह कारीगर की मेहनत, अनुभव और कल्पनाशीलता पर निर्भर करती है। यही वजह है कि तैयार होने वाली हर कलाकृति में एक अलग अंदाज दिखाई देता है।
पर्यटन के साथ रोजगार का जरिया
हुंडरू फॉल्स आने वाले पर्यटकों के लिए स्थानीय हस्तशिल्प सिर्फ खरीदारी का सामान नहीं, बल्कि क्षेत्र की स्थानीय कला और संस्कृति से जुड़ने का माध्यम भी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार हुंडरू क्षेत्र के ग्रामीणों को लकड़ी और बांस से उपयोगी तथा सजावटी वस्तुएं तैयार करने का प्रशिक्षण भी दिया गया है, ताकि उनकी पारंपरिक कला को बाजार मिल सके और रोजगार के अवसर बढ़ें।
पहले जहां लकड़ी से सीमित वस्तुएं बनाई जाती थीं, वहीं प्रशिक्षण और नए प्रयोगों के जरिए मास्क, खिलौने, सजावटी सामान और अन्य कलात्मक वस्तुएं तैयार करने की दिशा में भी काम हुआ है। इसका उद्देश्य स्थानीय हुनर को पहचान दिलाने के साथ ग्रामीणों की आय के अवसर बढ़ाना रहा है।
मशीनों के दौर में हाथों की कला बनी आकर्षण
आज के दौर में जहां लकड़ी की नक्काशी के लिए आधुनिक मशीनों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, वहीं पारंपरिक औजारों से काम करने वाले कारीगरों का हुनर अलग आकर्षण पैदा करता है।
एक साधारण लकड़ी के टुकड़े को अपने हाथों से आकार देकर सुंदर कलाकृति में बदलना सिर्फ मेहनत नहीं, बल्कि वर्षों के अनुभव और रचनात्मकता का परिणाम है। हुंडरू जैसे पर्यटन स्थलों पर ऐसी कला स्थानीय संस्कृति को पर्यटकों के सामने जीवंत रूप में प्रस्तुत करने का काम करती है।
पर्यटकों से स्थानीय कला को प्रोत्साहन देने की अपील
हुंडरू फॉल्स घूमने पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए स्थानीय हस्तशिल्प खरीदना और कारीगरों की कला को प्रोत्साहित करना क्षेत्र के ग्रामीण हुनर को आगे बढ़ाने में मददगार हो सकता है। पर्यटन से जुड़े स्थानीय बाजारों में हस्तनिर्मित वस्तुओं की मांग बढ़ने से कारीगरों को अपनी कला को रोजगार से जोड़ने का अवसर मिलता है।
हुंडरू फॉल्स सिर्फ झरने और प्राकृतिक खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि उसके आसपास दिखाई देने वाले स्थानीय हुनर के लिए भी खास है। एक पुरानी कुल्हाड़ी, लकड़ी का टुकड़ा और कारीगर के कुशल हाथ—इन तीन चीजों का मेल बताता है कि असली कला के लिए हमेशा महंगी मशीनों की जरूरत नहीं होती।

