News Lahar Reporter
जमशेदपुर : दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी एवं इसके आसपास के गांवों में रहने वाले आदिवासी समुदाय के नाम एक महत्वपूर्ण अपील जारी की गई है। इस अपील में सदियों से वन्य जीवों के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की परंपरा को बनाए रखने और उसे और मजबूत करने की बात कही गई है।
अपील में कहा गया है कि वन, वन्य जीव और वनवासी एक-दूसरे के पूरक हैं। आदिवासी समाज की संस्कृति में प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान हमेशा से रहा है। “अहिंसा परमोधर्म” की परंपरा को याद दिलाते हुए यह भी कहा गया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी अहिंसा का संदेश दिया था, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
पिछले दो सौ वर्षों में मानव गतिविधियों के कारण जंगलों का विस्तार और घनत्व कम हुआ है, जिससे कई वन्य जीव प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर पहुंच गई हैं। यह स्थिति न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि मानव जीवन के लिए भी गंभीर खतरा बन सकती है।
अपील में यह भी उल्लेख किया गया कि पिछले वर्ष विशु शिकार पर्व के दौरान दलमा क्षेत्र के आदिवासी भाइयों ने शिकार न कर एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया था, जिसकी देश-विदेश में सराहना हुई। अब समय आ गया है कि इस पहल को आगे बढ़ाते हुए शिकार की परंपरा को बदलकर संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ाया जाए।
वन विभाग ने आदिवासी समुदाय से आग्रह किया है कि वे इस वर्ष भी शिकार के बजाय वन्य जीवों की रक्षा का संकल्प लें और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति को सुरक्षित रखें।

