जमशेदपुर : बहरागोड़ा थाना क्षेत्र में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब स्वर्णरेखा नदी किनारे खुदाई के दौरान दो बेहद शक्तिशाली बम बरामद हुए। प्रत्येक बम का वजन करीब 227 किलो बताया जा रहा है और हैरानी की बात यह है कि ये करीब 80 साल तक रेत में दबे रहने के बावजूद सक्रिय थे।
सेना की विशेष टीम ने बुधवार को इन बमों को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर दिया। इसके लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। आसपास के घरों को खाली करा लिया गया था और ग्रामीणों को घरों से बाहर नहीं निकलने की हिदायत दी गई थी। पुलिस बल की तैनाती के बीच पूरा इलाका छावनी में तब्दील कर दिया गया।
जब बमों को कंट्रोल्ड ब्लास्ट के जरिए डिफ्यूज किया गया, तो जोरदार धमाके हुए। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, धमाका इतना तेज था कि कुछ पल के लिए धरती हिलती हुई महसूस हुई, वहीं कई लोगों ने इसे बेहद भयावह बताया।
यह घटना बहरागोड़ा के पानीपड़ा-नागसुड़ाई इलाके की है, जहां मजदूर बालू खनन के दौरान खुदाई कर रहे थे। इसी दौरान 7 मार्च को जमीन के अंदर से सिलेंडरनुमा पहला बम मिला। इसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और प्रशासन को सूचना दी गई।
जांच के लिए पहुंची सेना की टीम ने पुष्टि की कि ये बम ‘AN-M64’ श्रेणी के हैं, जिन पर “Made in USA” अंकित है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इनका उपयोग द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान किया जाता था। आशंका जताई जा रही है कि ये बम किसी सैन्य विमान से गिरकर यहां पहुंचे और समय के साथ रेत में दब गए।
हालांकि कुछ लोग इसे 2018 में कलाईकुंडा एयरबेस से जुड़े विमान हादसे से जोड़ रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों ने इस संभावना को खारिज किया है।
*कैसे किया गया डिफ्यूज?*
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली से सेना की बम निरोधक टीम को बुलाया गया। नदी किनारे करीब 100 मीटर गहरा गड्ढा खोदकर बमों को उसमें रखा गया और 500 से अधिक मिट्टी की बोरियों से ढककर नियंत्रित विस्फोट किया गया। सुरक्षा के मद्देनजर करीब 5 किलोमीटर के दायरे को खाली कराया गया था।
*80 साल बाद भी ‘जिंदा’ क्यों थे बम?*
विशेषज्ञों के अनुसार, बम लंबे समय तक कीचड़ और रेत में दबे रहने के कारण बाहरी प्रभाव से सुरक्षित रहे। ऑक्सीजन की कमी और स्थिर वातावरण के कारण ये निष्क्रिय नहीं हुए, बल्कि अंदर ही अंदर सक्रिय बने रहे। यही कारण है कि इतने वर्षों बाद भी ये खतरनाक साबित हो सकते थे।
इस घटना ने अवैध बालू खनन और सुरक्षा मानकों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। समय रहते बमों का पता चलना एक बड़ी दुर्घटना को टालने में मददगार साबित हुआ।
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