जमशेदपुर: जमशेदपुर के युवा कारोबारी कैरव गांधी के अपहरण की घटना को तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस अब तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। अपहृत कारोबारी का कोई सुराग नहीं लग पाने से परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है, वहीं इस वारदात से शहर के कारोबारी वर्ग में दहशत का माहौल है।
पुलिस के मुताबिक, अपहरणकर्ताओं ने इंटरनेट कॉल के जरिए परिजनों से पांच करोड़ रुपये की फिरौती मांगी है। जिस नंबर से कॉल आया है, उसके इंडोनेशिया का होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि पुलिस मान रही है कि तकनीक के जरिए कहीं से भी इंटरनेशनल कॉल की जा सकती है और यह कॉल पुलिस व परिजनों को गुमराह करने के लिए भी किया गया हो सकता है।
एसएसपी ने कैरव गांधी को सुरक्षित बरामद करने के लिए कई विशेष टीमें गठित की हैं। कुछ टीमों को उत्तर प्रदेश और बिहार भी भेजा गया है। इसके साथ ही सोनारी के सीएच एरिया, सोनारी, बिष्टुपुर समेत अन्य इलाकों में सड़क किनारे लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कैरव गांधी अपनी क्रेटा कार से किन रास्तों से गुजरे थे और क्या कोई उनका पीछा कर रहा था।
पुलिस का मानना है कि यह किसी संगठित गिरोह की करतूत हो सकती है। अपहरण से पहले कैरव गांधी की रेकी की गई और पूरी योजना के तहत इस घटना को अंजाम दिया गया। फिलहाल जिस नंबर से फिरौती की कॉल आई है, उसे ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है।
गौरतलब है कि मंगलवार को कैरव गांधी घर से करीब 12 बजे अपनी कार से निकले थे। उन्होंने परिजनों को बताया था कि पहले बिष्टुपुर स्थित एसबीआई और फिर आदित्यपुर में अपनी कंपनी जाएंगे, दोपहर दो बजे तक लौट आने की बात कही थी। जब वह तय समय पर घर नहीं पहुंचे और मोबाइल स्विच ऑफ मिला तो परिजनों ने पुलिस से संपर्क किया।
जांच के दौरान रात करीब आठ बजे उनकी कार सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल थाना क्षेत्र के कांदरबेड़ा के पास खड़ी मिली। वहीं उनका मोबाइल फोन भी बरामद हुआ। पुलिस का आकलन है कि मंगलवार को घर से निकलने के बाद रात आठ बजे से पहले किसी समय उनका अपहरण किया गया। इसके अगले ही दिन परिजनों के पास विदेश से इंटरनेट कॉल आया और पांच करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई।

