NEWS LAHAR REPORTER
जमशेदपुर : मोहर्रम की तैयारियों के बीच साकची स्थित हुसैनी मिशन की नई कमेटी के गठन को लेकर शिया समुदाय में विवाद गहरा गया है। धतकीडीह में आयोजित बैठक के बाद कमेटी के गठन की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। पूर्व पदाधिकारियों और कुछ सदस्यों ने नई कमेटी के चयन के तरीके पर आपत्ति जताई है, जिसके बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
हुसैनी मिशन के अध्यक्ष एवं राजद नेता मुनीर हसन ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल मोहर्रम की मजलिसों के सुचारू संचालन के लिए कार्यवाहक सचिव की नियुक्ति की गई है। उन्होंने कहा कि मोहर्रम संपन्न होने के बाद सचिव पद के लिए विधिवत चुनाव कराया जाएगा।
मोहर्रम शुरू होने में अभी लगभग 13 दिन शेष हैं। चांद दिखने के बाद मजलिसों का सिलसिला शुरू होगा। हर वर्ष की तरह इस बार भी साकची में हुसैनी मिशन की ओर से मजलिसों और मातमी जुलूसों का आयोजन किया जाएगा। हाल ही में आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जाकिर नगर स्थित शिया जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना जकी हैदर इस वर्ष मजलिसों को संबोधित करेंगे।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब हुसैनी मिशन के पूर्व सचिव मोहम्मद राशिद ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनका कहना है कि पिछले वर्ष अक्टूबर में हुई बैठक में पुरानी कमेटी को समाप्त कर नई कमेटी गठित करने की बात हुई थी। मीटिंग के रजिस्टर में इसका जिक्र है। अगर कोई कह रहा है कि कमेटी खत्म होने की बात नहीं हुई तो वह गलत कह रहा है।
मोहम्मद राशिद का कहना है कि कमेटी बनाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी कारण उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया।
दूसरी ओर अध्यक्ष मुनीर हसन का कहना है कि अक्टूबर की बैठक में कमेटी भंग करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया था। उन्होंने बताया कि नई कमेटी के गठन के लिए अधिसूचना जारी की गई थी, लेकिन निर्धारित समय सीमा के भीतर किसी भी पद के लिए आवेदन प्राप्त नहीं हुआ। इसलिए पुरानी कमेटी को ही जारी रखा गया।
इसी बीच हुसैनी मिशन के नौहाखान जीशान रिजवी ने दावा किया है कि उन्होंने संयुक्त सचिव अथवा उप सचिव पद के लिए आवेदन दिया था। साथ ही उनके चाचा सैयद आजम उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ना चाहते थे। उनका आरोप है कि आवेदन देने के बावजूद उन्हें चुनाव प्रक्रिया अथवा नई कमेटी के गठन की कोई जानकारी नहीं दी गई।
हालांकि अध्यक्ष मुनीर हसन का कहना है कि जीशान का आवेदन निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद प्राप्त हुआ था, इसलिए उस पर विचार नहीं किया गया।
इधर मोहर्रम की मजलिसों के आयोजन के लिए उपयुक्त इमामबारगाह की तलाश भी शुरू हो गई है। शिया समुदाय का कहना है कि जमशेदपुर में उनके लिए अब तक न तो स्थायी इमामबारगाह उपलब्ध कराया गया है और न ही कोई सामुदायिक भवन। हर वर्ष उन्हें अस्थायी रूप से क्वार्टर आवंटित कराना पड़ता है, जहां बुनियादी सुविधाओं की कमी रहती है। विशेषकर बरसात के मौसम में महिलाओं और बुजुर्गों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
समुदाय के लोगों ने सरकार और संबंधित संस्थाओं से मांग की है कि अन्य समुदायों की तरह शिया समाज को भी साकची क्षेत्र में इमामबारगाह और सामुदायिक भवन के लिए भूमि उपलब्ध कराई जाए, ताकि धार्मिक आयोजनों का संचालन बेहतर ढंग से किया जा सके।
अध्यक्ष मुनीर हसन ने कहा कि मोहर्रम के बाद सचिव पद का चुनाव पूरी पारदर्शिता के साथ कराया जाएगा। वहीं जीशान रिजवी का कहना है कि नई कमेटी का गठन लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव कराकर ही होना चाहिए।

