जमशेदपुर : Tata Steel ने पर्यावरण के अनुकूल और सतत स्टील उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक और अहम कदम उठाया है। कंपनी ने University of Science and Technology Beijing (यूएसटीबी) के साथ लो-कार्बन स्टील मेकिंग तकनीकों के विकास के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस समझौते के तहत टाटा स्टील, टाटा स्टील रिसर्च एंड इनोवेशन लिमिटेड और यूएसटीबी की संयुक्त रिसर्च टीमें चार प्रमुख क्षेत्रों पर काम करेंगी। इनमें स्क्रैप आधारित स्टील उत्पादन, स्टील वेस्ट का बेहतर उपयोग, तैयार उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार और कार्बन कैप्चर व उपयोग से जुड़ी तकनीकों का विकास शामिल है।
इस साझेदारी के जरिए यूएसटीबी की शैक्षणिक विशेषज्ञता और उसकी पायलट-स्तरीय सुविधाओं का लाभ उठाया जाएगा। इससे नई तकनीकों का परीक्षण, पायलट प्रोजेक्ट के रूप में क्रियान्वयन और भविष्य में बड़े औद्योगिक स्तर पर विस्तार का रास्ता आसान होगा।
टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट सुबोध पांडेय ने कहा कि लो-कार्बन स्टील मेकिंग आज की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है। कंपनी इस दिशा में लगातार नवाचार कर रही है और इस साझेदारी से नई तकनीकों को विकसित करने में मदद मिलेगी, जो सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों को हासिल करने में सहायक होंगी।
वहीं यूएसटीबी के वाइस प्रेसिडेंट प्रो. शुकियांग जियाओ ने कहा कि दोनों संस्थानों के बीच पहले से मजबूत सहयोग रहा है और यह नया समझौता उस संबंध को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि रिसर्च के परिणामों को तेजी से औद्योगिक उपयोग में लाने की दिशा में यह साझेदारी अहम भूमिका निभाएगी।
अकादमिक विशेषज्ञ शिनपिंग माओ ने भी इस पहल को स्टील उद्योग के ग्रीन ट्रांजिशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि कार्बन न्यूट्रैलिटी हासिल करने के लिए इस तरह के वैश्विक सहयोग बेहद जरूरी हैं।
कुल मिलाकर, टाटा स्टील और यूएसटीबी के बीच यह साझेदारी न सिर्फ तकनीकी विकास को बढ़ावा देगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर स्टील उद्योग को अधिक स्वच्छ और टिकाऊ बनाने में भी मददगार साबित होगी।
मेटा डिस्क्रिप्शन: टाटा स्टील और यूएसटीबी ने लो-कार्बन स्टील तकनीक के विकास के लिए समझौता किया, जिससे पर्यावरण अनुकूल उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

