देश में बढ़ते गैस संकट का असर अब दवा उद्योग पर भी साफ दिखाई देने लगा है। प्रोपेन गैस की भारी कमी के कारण गुजरात, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की कई फार्मा कंपनियां उत्पादन बंद करने की स्थिति में पहुंच गई हैं।
जानकारी के अनुसार, प्रोपेन गैस का उपयोग दवा निर्माण में रिएक्टर्स और स्टीम जेनरेशन के लिए किया जाता है। इसकी कमी से बॉयलर ऑपरेशन पर सीधा असर पड़ा है, जिससे उत्पादन प्रक्रिया बाधित हो रही है। इसका असर पैरासिटामोल, विटामिन और हार्मोन जैसी जरूरी दवाओं के निर्माण पर पड़ रहा है।
इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक, हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले दिनों में देश में दवाओं की कमी देखने को मिल सकती है। भारत में बड़ी संख्या में एपीआई (Active Pharmaceutical Ingredients) मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स काम करती हैं, जहां पैरासिटामोल, मेटफॉर्मिन, मेट्रोनिडाजोल, डाइक्लोफेनाक, निमेसुलाइड, सिप्रोफ्लोक्सेसिन, फॉलिक एसिड और विटामिन C जैसी दवाएं बनाई जाती हैं।
Pharmexcil के पूर्व चेयरमैन दिनेश दुआ के अनुसार, करीब 200 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स अगले 7 से 10 दिनों में उत्पादन बंद कर सकती हैं, जिससे दवा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो यह संकट देशभर में दवाओं की उपलब्धता को प्रभावित कर सकता है, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

