जमशेदपुर : शहर की प्रमुख सामाजिक संस्था ब्रह्मऋषि विकास मंच, जमशेदपुर ने संगठन की लोकतांत्रिक परंपराओं और भविष्य की रक्षा के लिए प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। मंच की ओर से धालभूम अनुमंडल पदाधिकारी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए अध्यक्ष एवं महासचिव पद के लिए प्रस्तावित चुनावों पर गंभीर आपत्ति जताई गई है।
ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि ब्रह्मऋषि विकास मंच एक विधिवत पंजीकृत सामाजिक संस्था है, जिसका संचालन, पदाधिकारियों का चयन और चुनाव प्रक्रिया केवल पंजीकृत बायलॉज के अनुरूप ही वैध मानी जा सकती है। बायलॉज, आमसभा की स्वीकृति और निर्धारित प्रक्रिया के बिना कराया गया कोई भी चुनाव अवैधानिक और अस्वीकार्य होगा।
मंच ने आरोप लगाया है कि वर्तमान में अध्यक्ष एवं महासचिव पद के लिए जिन चुनावों की चर्चा हो रही है, वे न तो पंजीकृत बायलॉज के अनुसार हैं और न ही आमसभा की स्वीकृति प्राप्त है। ऐसे चुनाव संस्था की लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ हैं। इसी आधार पर मंच ने किसी भी एकतरफा या बायलॉज-विरुद्ध चुनाव पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
ज्ञापन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि शीर्ष पदों के चुनाव प्रशासनिक पर्यवेक्षण में, निष्पक्ष, पारदर्शी और विधि-सम्मत तरीके से मतदान प्रक्रिया द्वारा कराए जाएं, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार का विवाद या संदेह न रहे और संस्था की वर्षों की साख सुरक्षित रह सके।
मंच ने दो टूक कहा है कि “संस्था व्यक्ति से बड़ी होती है और नियम किसी एक के लिए नहीं बदले जा सकते।”
ब्रह्मऋषि विकास मंच ने धालभूम अनुमंडल प्रशासन से पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए बायलॉज के विरुद्ध किसी भी गतिविधि पर रोक लगाने और निष्पक्ष, पारदर्शी व विधिसम्मत चुनाव सुनिश्चित कराने की मांग की है।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन समय रहते हस्तक्षेप करेगा? क्या सामाजिक संस्थाओं में लोकतंत्र की रक्षा होगी, या फिर नियमों की अनदेखी कर सत्ता हथियाने की कोशिश सफल होगी?

