NEWS LAHAR REPORTER
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के लिए हुए चुनाव में बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ. खलीलुर रहमान ने जीत हासिल कर ली है। मंगलवार को आयोजित गुप्त मतदान में उन्होंने साइप्रस के उम्मीदवार एंड्रियास एस. काकौरिस को हराकर महासभा के अगले अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त किया।
193 सदस्य देशों वाली महासभा में कुल 190 देशों ने मतदान किया। इनमें डॉ. खलीलुर रहमान को 99 वोट मिले, जबकि साइप्रस के प्रतिनिधि एंड्रियास काकौरिस को 91 वोट प्राप्त हुए। तीन सदस्य देशों ने मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया।
सितंबर 2026 में डॉ. रहमान आधिकारिक रूप से अपना कार्यभार संभालेंगे। वे वर्तमान अध्यक्ष और जर्मनी की पूर्व विदेश मंत्री एनालेना बेयरबॉक का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल इसी वर्ष सितंबर में समाप्त हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र की परंपरा के अनुसार महासभा अध्यक्ष का पद विभिन्न क्षेत्रीय समूहों के बीच रोटेशन के आधार पर तय होता है और इस बार यह अवसर एशिया-प्रशांत क्षेत्र को मिला था।
तीन उम्मीदवारों से शुरू हुआ था मुकाबला
शुरुआत में इस चुनावी दौड़ में बांग्लादेश, साइप्रस और फिलिस्तीन के उम्मीदवार शामिल थे। हालांकि मतदान से पहले फिलिस्तीन के उम्मीदवार रियाद मंसूर ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली, जिसके बाद मुकाबला सीधे बांग्लादेश और साइप्रस के बीच रह गया।
भारत ने दी बधाई
भारत के विदेश मंत्री entity[“people”,“एस. जयशंकर”,“भारत के विदेश मंत्री”] ने डॉ. खलीलुर रहमान को जीत की बधाई देते हुए कहा कि भारत बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने और साझा वैश्विक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने को उत्सुक है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि entity[“people”,“पर्वथनेनी हरीश”,“संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि”] ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए सफल कार्यकाल की कामना की।
कौन हैं डॉ. खलीलुर रहमान?
डॉ. खलीलुर रहमान एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री और अनुभवी राजनयिक माने जाते हैं। उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की है और संयुक्त राष्ट्र सचिवालय में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। रोहिंग्या शरणार्थी मुद्दे पर वे बांग्लादेश सरकार के विशेष प्रतिनिधि के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
बांग्लादेश में 2024 के राजनीतिक बदलावों के बाद बनी नई सरकार में उन्हें इस वर्ष विदेश मंत्री बनाया गया था। इससे पहले वे अंतरिम प्रशासन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) के पद पर भी कार्यरत रह चुके हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष पद क्यों महत्वपूर्ण है?
हालांकि महासभा अध्यक्ष के पास प्रत्यक्ष कार्यकारी शक्तियां सीमित होती हैं, फिर भी यह पद वैश्विक कूटनीति में बेहद प्रतिष्ठित माना जाता है। महासभा वह मंच है जहां दुनिया के सभी सदस्य देश समान अधिकार के साथ अपनी बात रखते हैं।
संयुक्त राष्ट्र का बजट, वैश्विक नीतियां, अंतरराष्ट्रीय संधियां और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रस्ताव महासभा के माध्यम से आगे बढ़ाए जाते हैं। यूक्रेन और गाजा जैसे अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के दौरान भी महासभा वैश्विक चर्चा का प्रमुख केंद्र बनी रही है, खासकर तब जब सुरक्षा परिषद में वीटो के कारण निर्णय प्रभावित होते हैं।
जीत के बाद क्या बोले रहमान?
चुनाव में जीत के बाद डॉ. रहमान ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र का 81वां सत्र ऐसे समय में शुरू होगा जब दुनिया कई चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने युद्ध, मानवाधिकारों में गिरावट, विकास की धीमी गति और मानवीय संकटों को गंभीर चिंता का विषय बताया।
उन्होंने कहा कि सदस्य देशों को मिलकर संयुक्त राष्ट्र के प्रति वैश्विक विश्वास को मजबूत करना होगा। साथ ही उन्होंने संगठन के सामने मौजूद वित्तीय चुनौतियों से निपटने के लिए सभी देशों से सहयोग की अपील की।
महासचिव ने जताया भरोसा
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने डॉ. रहमान को बधाई देते हुए कहा कि उनका व्यापक राजनीतिक और कूटनीतिक अनुभव महासभा और पूरे संयुक्त राष्ट्र तंत्र के लिए लाभकारी साबित होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि रहमान के नेतृत्व में संगठन 21वीं सदी की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकेगा।
गौरतलब है कि बांग्लादेश इससे पहले वर्ष 1986 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्षता कर चुका है। लगभग चार दशक बाद एक बार फिर यह जिम्मेदारी बांग्लादेश के हिस्से आई है।
