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चांडिल डैम विस्थापन के अभिलेखों की जांच और पूरी फाइल सार्वजनिक करने की ग्रामीणों ने उठाई मांग
चांडिल। चांडिल डैम विस्थापन के अभिलेखों में हेवेन गांव को 180 आरएल के दायरे में शामिल किए जाने को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि अक्टूबर 2011 तक हेवेन गांव 180 आरएल के दायरे में दर्ज नहीं था, जबकि बाद के अभिलेखों में इसे शामिल किया गया। ग्रामीणों ने इस बदलाव के आधार, आदेश और सर्वे प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार, हेवेन गांव का भूमि अधिग्रहण वर्ष 2003 में ही हो चुका था। ऐसे में उनका सवाल है कि 180 आरएल में शामिल किए जाने की स्थिति उस समय के भूमि अधिग्रहण प्रस्ताव, नक्शा, खेसरा पंजी और पुनर्वास संबंधी रिकॉर्ड में क्या दर्ज थी।
नए सर्वे और आदेश को लेकर उठे सवाल
ग्रामीणों ने मांग की है कि यह स्पष्ट किया जाए कि हेवेन गांव को 180 आरएल के दायरे में शामिल करने के लिए नया सर्वे कब और किसके आदेश पर कराया गया। सर्वे में शामिल अमीन और अन्य कर्मचारियों की जानकारी के साथ-साथ निरीक्षण रिपोर्ट तथा संबंधित अधिकारियों के आदेश भी सार्वजनिक किए जाएं।
इसके अलावा ग्रामीणों ने राजस्व एवं पुनर्वास अभिलेखों में हुए कथित बदलाव की तारीख और उसके आधार को भी सार्वजनिक करने की मांग की है।
कई विभागों की फाइलों की जांच की मांग
ग्रामीणों ने अपर निदेशक कार्यालय, पुनर्वास कार्यालय चांडिल, जल संसाधन विभाग, अंचल कार्यालय और जिला प्रशासन से संबंधित फाइलों की जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2003 के भूमि अधिग्रहण रिकॉर्ड और बाद के 180 आरएल अभिलेखों में यदि अंतर है, तो उसके दस्तावेजी आधार को सामने लाना जरूरी है। उनका कहना है कि पुराने और नए रिकॉर्ड की जांच तथा पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक होने के बाद ही विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से सभी संबंधित दस्तावेजों और अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कर पूरी फाइल सार्वजनिक करने की मांग की है, ताकि 180 आरएल में हेवेन गांव को शामिल किए जाने की स्थिति और उसके आधार को लेकर उठ रहे सवालों का तथ्यात्मक समाधान हो सके।
