NEWS LAHAR REPORTER
जिला परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी सुरीन के नेतृत्व में प्रदर्शन, केंद्र सरकार के नाम सौंपा ज्ञापन
नोवामुंडी। केंद्र सरकार के खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 (MMDR) के विरोध में शनिवार को नोवामुंडी प्रखंड मुख्यालय परिसर में झामुमो की ओर से धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व पश्चिमी सिंहभूम जिला परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी सुरीन ने किया।
धरना-प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए MMDR संशोधन कानून के खिलाफ विरोध जताया। वक्ताओं ने कहा कि खनिज संपदा से जुड़े अधिकारों और राज्य के हितों को प्रभावित करने वाले प्रावधानों का विरोध जारी रहेगा। झामुमो ने 19 सितंबर को राज्यभर के प्रखंड मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन का कार्यक्रम निर्धारित किया था।
रोहित पांडे की टीम ने भी दर्ज कराई सहभागिता
धरना-प्रदर्शन में झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के युवा नेता रोहित पांडे एवं उनकी टीम ने भी जिला परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी सुरीन के समर्थन में सहभागिता की। इस दौरान केंद्र सरकार के संशोधन के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने की बात कही गई।
वक्ताओं ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और खनन से जुड़े नीतिगत बदलावों का राज्य के आर्थिक हितों एवं स्थानीय लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
केंद्र सरकार का अलग पक्ष
MMDR संशोधन अधिनियम, 2026 को लेकर केंद्र सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य प्रमुख खनिज क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता, समान एवं पूर्वानुमेय वित्तीय व्यवस्था तथा निवेश को बढ़ावा देना है। केंद्र के अनुसार, राज्यों को मिलने वाले खनन क्षेत्र के लगभग 90 प्रतिशत कर एवं वैधानिक भुगतान की मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी।
वहीं, इस संशोधन पर संसदीय शोध संस्था PRS के विश्लेषण के अनुसार कानून में खनिज-अधिकार और खनिज-युक्त भूमि पर राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले कुछ कर, उपकर एवं अन्य शुल्कों पर केंद्रीय स्तर से निर्धारित शर्तों के अधीन सीमाएं लगाई गई हैं।
केंद्र सरकार के नाम सौंपा ज्ञापन
धरना-प्रदर्शन के बाद प्रदर्शनकारियों ने नोवामुंडी प्रखंड कार्यालय पहुंचकर केंद्र सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से MMDR संशोधन अधिनियम को वापस लेने की मांग की गई।
कार्यक्रम में झामुमो के बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, समर्थक एवं स्थानीय लोग मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार के संशोधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इसे वापस लेने की मांग उठाई गई।

